राज्यस्तरीय ब्लॉग लेखक विवेक धुर्वे ने लिखी इनकी सक्सेस स्टोरी- पढई तुंहर दुआर के आज के हमारे नायक त्रिनाथ राणा का चयन हुआ, जिससे रायगढ़ जिले का मान बढ़ाया।
बालोद/रायगढ़ -रायगढ़ जिले के नवाचारी शिक्षक त्रिनाथ राणा खिलौने बनाकर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं सहायक शिक्षक, शास. प्राथमिक विद्यालय कसहीपाली,विकास खंड-बरमकेला,जिला-रायगढ़ के उक्त शिक्षक का चयन हमारे नायक में हुआ है “पढ़ई तुंहर दुआर” पोर्टल से शिक्षा के स्तर को उठाने का प्रयास सरकार लगातार कर रही है। जिसमें त्रिनाथ ने भी अपनी जगह बना ली.

बालोद ब्लॉक के सांकरा ज हायर सेकेंडरी स्कूल के व्याख्याता विवेक धुर्वे राज्यस्तरीय ब्लॉग लेखक ने उनकी कहानी लिखी है। जिसमें बताया गया है कि कैसे मिट्टी से बने व अन्य खिलौने के माध्यम से एक रुचिपूर्ण तरीके से अपने विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहे है।

उनका मानना है कि शिक्षा का अभिप्राय केवल पुस्तकों का ज्ञान अर्जित करना ही नहीं, अपितु शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के मानसिक विकास के साथ-साथ उसके शारीरिक विकास की ओर भी ध्यान देना है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए खेल-कूद का महत्व किसी से कम नहीं। यदि शिक्षा से बुद्धि का विकास होता है तो खेलों से शरीर का । ईश्वर ने मनुष्य को शारीरिक, मानसिक तथा आत्मिक-तीन शक्तियाँ प्रदान की हैं। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए इन तीनों का संतुलित रूप से विकास होना आवश्यक है। “शिक्षा एक निरंतर प्रक्रिया है, यह एक साइकिल की तरह है। यदि आप पेडल नहीं घुमाते हैं तो आप आगे नहीं जाते हैं” खेलना बच्चों के स्वभाव में होता है। आज की शिक्षा-प्रणाली में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि बच्चों की पुस्तकों की अपेक्षा खेलों के माध्यम से शिक्षा ग्रहण करवाई जाएँ। आज शिक्षा-विदों ने खेलों को शिक्षा का विषय बना दिया है, ताकि विद्यार्थी खेल-खेल में ही जीवन के सभी मूल्यों को सीख जाएं और अपने जीवन में अपनाएँ।
इनके द्वारा निम्न कार्य किये जा रहे है-

ऑनलाइन कक्षा– कमजोर नेटवर्क व मोबाइल की असुविधा के कारण सभी बच्चों को शिक्षा से जोड़ना एक चुनौती से कम नही थी फिर भी ऑनलाइन कक्षा में बच्चे नही जुड़ पाने से हार नही माने।
मोहल्ला कक्षा– इसके चलते अपने गाँव के जनसमुदाय से मिलकर मोहल्ला कक्षा से सभी विद्यार्थियों को जोड़ने की मुहिम शुरू की व आज सभी बच्चों को नए नए नवाचार से शिक्षा प्रदान कर रहे है।
विभिन्न वस्तुओं से विभिन्न प्रकार के खिलौने तैयार
1. मिट्टी के खिलौने- इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की फल निर्मित किया गया हैं, जैसे सेब, संतरे, आम, इमली, अनार, नींबू ,पपीता, केले, अमरूद इत्यादि।
सब्जियों में सेम ,बैंगन, आलू, टमाटर, मूली, गाजर, मशरूम, मटर,खीरा, करेला, परवल, भिंडी,शिमला मिर्च, प्याज, लहसुन, मिर्च इत्यादि।
जीव जंतु- बाघ, शेर, चीता, जगुआर, तेंदुआ, वनभैंसा,डाइनासोर, चिड़िया, हंस, इत्यादि।अन्य- राष्ट्र चिह्न, बुद्ध आदि
उपयोग- इन खिलौनों का उपयोग सभी विषयों को पढ़ाने में किया जाता है जैसे

हिंदी में-फल व सब्जियों के नाम बताने में । जीव जंतुओं के नाम,गुण एवं वर्गीकरण बताने में।
अंग्रेजी में फल व सब्जियों, जीव जंतुओं के नाम, रंग, गुण इत्यादि बताने में।
गणित में- गिनती, लाभ-हानि, क्रय विक्रय , मुद्रा, भार आदि प्रकरणों में।
पर्यावरण-पोषण व भोजन से संबंधित समस्त पाठों में।
जीव जंतुओं के खिलौनों का उपयोग जानवरों के आवास भोजन व अन्य विभिन्न पाठों में किया जाता है।
2.पेपर मैश के खिलौने-कागज के टुकड़ों को पानी में भिगोकर, उसे कुचला गया एवं उसमें फेविकोल मिलाकर मैश तैयार किया गया एवं उससे विभिन्न सामग्री तैयार की गयी है।
जैसे- फल व सब्जियां, आलू, प्याज, अंडे, सेब, संतरे, सीताफल आदि। विभिन्न प्रकार के पशु पक्षी यथा- मगरमच्छ शेर का मुंह, बया, मैना, पहाड़ी मैना, तोता, आरियल, राबिन,बुलबुल, सुरेला, पड़की, कोयल आदि।
ये हैं इनका उपयोग-

इन खिलौनों का उपयोग भी मिट्टी के खिलौनों की भांति समस्त विषयों को रोचक बनाने में किया जा सकता है। इनका कहना है कि इन खिलौनों के प्रयोग से पाठ्यवस्तु रोचक हो जाती है। बच्चों के साथ मिलकर खिलौने बनाने से शिक्षक व बच्चों के मध्य आत्मीयता बढ़ती है। बच्चों में कला के प्रति रुचि जागती है। इसके अतिरिक्त इन खिलौनों को बनाने की विधि का ज्ञान भी होता है।इन खिलौनों के निर्माण की लागत अत्यंत कम है और ये सरलता से बनाये जा सकते हैं
3.लकड़ी, गत्ते व कागज के खिलौने-लकड़ी के खिलौने गत्ते व कागज के खिलौने बनाना भी सिखाया जा रहा है।
4.विभिन्न प्रकार की रक्षा सामग्री,मिसाईल-अग्नि श्रेणी १,२,३,४,५, ब्रह्मोस, पृथ्वी, आकाश, नाग, प्रहार आदि) अर्जुन टैंक, T72 टैंक.आदि) देश की रक्षा व देशभक्ति से संबंधित समस्त पाठों में इनका उपयोग किया जाता है।
