बालोद/ दल्ली राजहरा। दल्ली राजहरा के माथुर परिवार के एक बेटे आलोक माथुर का विगत वर्ष निधन हो गया था। उनकी याद में उनकी माता शिरोमणि माथुर (वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष व लेखिका) ने एक मार्मिक किताब लिखी है। जिसमें उन्होंने अपने बेटे की यादों को अक्षरों में पिरोया है।और उन पर कई कविता और कहानियों से संकलित किताब लिख कर इसे अर्पण नाम दिया है। अपने बेटे की यादों को अर्पित करते हुए इस किताब से अब कईयों प्रेरित होंगे। इस किताब का विमोचन आज यानी 4 फरवरी को होने जा रहा है। विमोचन के मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री अनिला भेड़िया हैं।

इनके अलावा अन्य अतिथियों के रूप में संसदीय सचिव व गुंडरदेही के विधायक कुंवर सिंह निषाद, बालोद विधायक संगीता सिन्हा, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चंद्रप्रभा सुधाकर, अपेक्स बैंक के पूर्व अध्यक्ष महावीर सिंह राठौर, छत्तीसगढ़ फिल्म एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल, प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष बीरेश ठाकुर, नगर पालिका दल्ली राजहरा के अध्यक्ष शिबू नायर, प्रदेश किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष आलोक ठाकुर, भानुप्रतापपुर के पूर्व विधायक ब्रह्मानंद नेताम,डौंडीलोहारा के पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम माथुर सिनेप्लेक्स दल्ली राजहरा में दोपहर 3 बजे से आयोजित है।

अर्पण किताब की लेखिका शिरोमणि माथुर ने DailyBalodNews को बताया कि वह अभी नहीं कई सालों से कविता कहानियां लिखती रहती है। ब्रह्मकुमारी संस्थान से भी जुड़ी हुई है। विभिन्न अवसर पर उनके लेख प्रकाशित होते रहे हैं। इसी बीच उनके बेटे आलोक माथुर की असमय मृत्यु हो गई।

जब उनकी लिखी कहानियां कविता अलग-अलग जगह प्रकाशित होती थी तो मां की लिखी चीजों को उनका बेटा बहुत ही चांव से पढ़ता था और कई बार पढ़ता था। उसे बहुत खुशी होती थी। बेटे की यादें उनके जाने के बाद मां को बहुत सताती रही और उनकी याद को एक यादगार बनाने के लिए उन्होंने सोचा कि क्यों ना एक किताब लिखूं और उन्होंने लिखना शुरू किया। परिवार वालों से भी सलाह ली। सभी ने उनका हौसला बढ़ाया और देखते-देखते किताब तैयार हो गई। जिसका प्रकाशन भी हो गया है और विमोचन आज होने जा रहा है।
देखिए क्या कुछ है इस अर्पण किताब में?

लेखिका शिरोमणि माथुर ने इस किताब में उन्होंने अपने बेटे के वात्सल्य, ममता सहित हर तरह की भावना को समाहित किया है। न्याय व्यवस्था, नारी का स्वाभिमान,नमक हराम, गवाही इस संबंध में भी उन्होंने 4 कहानियां लिखी है। 2 खंड में यह किताब लिखी गई है। जिसमें उन्होंने पुत्र को समर्पित करते हुए लौट के आजा आ मेरे लाल, तुम गए कौन से देश, चांद सितारे- गहरी यादें छोड़ गए तुम, पुकार- यह आंखें तुम्हारी बात निहारे सहित अन्य शीर्षक व पंक्तियों से दिल को छू लेने वाली कविता लिखी है।जीवनसाथी को समर्पित, भाई के प्रति, पुत्रवधू के प्रति, श्रमिकों के प्रति, कलम कारों के प्रति उन्होंने इस कविता में लेख लिखे हैं। इसके अलावा परमपिता परमात्मा के प्रति ईश्वरी भाव को दर्शाती इस कविता में कई बिंदुओं पर आलेख लिखे गए हैं।
