माधुरी दीपक यादव,संतोष साहू, मुकेश सेन (टीम डेली बालोद न्यूज)। आज विश्व पर्यटन दिवस पर हम बालोद जिले के ऐसे प्रमुख 15 पिकनिक स्पॉट की जानकारी सामने ला रहे हैं। जो अपनी खासियत और खूबसूरती की वजह से पूरे छत्तीसगढ़ के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। शासन प्रशासन द्वारा कुछ जगहों को अपने संरक्षण में लेकर विकास भी किया जा रहा है। तो कई जगह स्थानीय ग्रामीण भी समिति बनाकर धार्मिक पर्यटन स्थलों को बढ़ावा दे रहे हैं। शुरुआत अगर हम जिला मुख्यालय से ही करते हैं तो तांदुला डैम की तस्वीर आज से लगभग 10 साल पहले की तुलना में अब काफी बदल चुकी है। गंगरेल डैम कहे या मिनी गोवा की तर्ज पर डैम को एक पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करने का काम सही मायने में अब होता दिखाई दे रहा है। जहां अब जल्द ही वाटर पार्क की सुविधा भी शुरू होने वाली है। बोटिंग का मजा तो कई महीनो से यहां पर्यटक ले ही रहे हैं तो रिसॉर्ट और प्राकृतिक वादियों के बीच समय बिताने की सुविधा यहां उपलब्ध है। दूर दराज से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष आवासों की सुविधा भी यहां दी जाती है। पहले यह क्षेत्र वीरान रहता था लेकिन अब जिला मुख्यालय के बगल में आदमाबाद क्षेत्र में तांदुला को इस तरह से संवारा गया है कि अब यहां दूर-दूर से पर्यटक पहुंच रहे हैं। वाटर पार्क खुलने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या दुगनी होने का अनुमान है। वर्तमान में वाटर पार्क का आनंद लेने के लिए लोगों को गर्मी के दिनों में राजनांदगांव, रायपुर या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। तांदुला बांध
बालोद शहर से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तांदुला बांध, पर्यटकों के लिए एक आकर्षक स्थल है। यह विशाल जलाशय अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहाँ दो जलाशय हैं — तांदुला जलाशय और सूखा जलाशय — जो अपनी शांत जलराशि, हरी-भरी वनस्पतियों और मनमोहक दृश्यों से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करते हैं।
अन्य डैम के बारे में भी जानिए
मटियामोती बांध: मटियामोती बांध, प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है। खरखरा बांध से 5–6 किलोमीटर दूर स्थित यह जलाशय, अपनी शांति और सुंदरता के लिए जाना जाता है। चारों तरफ फैली हरियाली, मन को मोह लेती है। यहां आकर आप प्रकृति के करीब महसूस करेंगे और शांति का अनुभव करेंगे। शाम के समय, यहां का नज़ारा और भी मनमोहक हो जाता है। सूर्यास्त का सुनहरा रंग, पानी पर पड़ता है और चारों तरफ एक अद्भुत रंगत बिखेर देता है। यह दृश्य, आपको मंत्रमुग्ध कर देगा।
गोंदली डैम: प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर बालोद जिला, अपनी विविधता और समृद्ध संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां जलाशयों का जाल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इनमें से गोंदली जलाशय, जो जिला मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्रकृति का अद्भुत नमूना है।
चारों ओर घने जंगलों से घिरा यह जलाशय, शांत और मनोरम वातावरण प्रदान करता है। यहां का पानी इतना स्वच्छ और नीला है कि यह आसमान को प्रतिबिम्बित करता है। शांत झील में नाव की सवारी, पक्षियों का मधुर संगीत, और हवा में घुली खुशबू, यहाँ के वातावरण को और भी मनमोहक बनाते हैं। हाल ही में जब गेट की मरम्मत के लिए विभाग द्वारा डैम को सुखाया गया था तो यहां प्राचीन काल का एक शीतला या महामाया का मंदिर का अवशेष बाहर निकला था। जिसे देखने के लिए भी पूरे छत्तीसगढ़ के पर्यटक पहुंचते रहे। जो इस जगह की प्राचीन संस्कृति/ सभ्यता को भी बयां कर रही है। पहले यहां गोंदली सहित 6 से 7 गांव हुआ करते थे। जिन्हें दूसरी जगह विस्थापित करके डैम बनाया गया है।
खरखरा बांध लोहारा:
बालोद शहर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खरखरा बांध, प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग है। यह एक मनमोहक जलाशय है जो चारों तरफ से घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों से घिरा हुआ है। खरखरा बांध, सिंचाई के लिए बनाया गया था, लेकिन आज यह पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। बरसात के मौसम में, खरखरा जलप्रपात अपनी सुंदरता का अद्भुत प्रदर्शन करता है। जब बांध का पानी ओवरफ्लो होता है, तो जलप्रपात का नजारा देखने लायक होता है।
प्रमुख देवी मंदिरों में भी जुटती है आस्था की भीड़
सियादेवी मंदिर और झरना: बालोद जिले में स्थित सियादेवी मंदिर, नारा गांव की हरी-भरी पहाड़ियों के ऊपर स्थित एक प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर है। माता सीता को समर्पित यह मंदिर, ना केवल स्थानीय लोगों के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षक स्थल है। बालोद जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के कारण, दूर-दूर से भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। सियादेवी मंदिर, नारा पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। पहाड़ी की ऊंचाई से, आसपास के मनोरम दृश्य, मन को मोह लेते हैं। हरी-भरी घाटियां, शांत वातावरण और मंदिर के पास बहने वाली झरना जिसे “सियादेवी जलप्रपात” कहते है, इस स्थान को एक प्राकृतिक स्वर्ग बनाते हैं। पर्यटक यहाँ आकर प्रकृति का आनंद लेने के साथ-साथ, माता सीता के दर्शन भी करते हैं।
गंगा मैया मंदिर: बालोद जिला मुख्यालय से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम झलमला में स्थित गंगा मैया का मंदिर अपनी अद्भुत शक्ति और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर ना सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश और विदेश में भी श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। हर साल दोनों नवरात्रि में यहां भव्य मेला लगता है और विविध धार्मिक आयोजन होते हैं। गंगा मैया की कहानी तांदुला नहर के निर्माण से भी जुड़ी है। मान्यता है कि यह मूर्ति अंग्रेज शासन काल के दौरान नहर के निर्माण के दौरान खुदाई में मिली थी और मूर्ति चमत्कारिक माना जाता है।
गौरैया धाम चौरेल: गौरैया धाम चौरेल, बालोद, छत्तीसगढ़ में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है, जो जिला मुख्यालय से मात्र 20 किमी की दुरी पर तांदुला नदी के सुरम्य तट पर स्थित है। यह पवित्र धाम अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता है। गौरैया धाम को शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहां माता गौरी का मंदिर स्थित है, जो देवी दुर्गा का ही एक रूप है। माना जाता है कि देवी गौरी यहां स्वयं प्रकट हुई थीं। इस धाम में भगवान शिव का भी एक प्राचीन मंदिर है।
भोला पठार पर्रेगुड़ा: प्रकृति की गोद में बसा भोला पठार, बालोद जिले का एक ऐसा रत्न है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह जिला मुख्यालय से मात्र 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इसे छत्तीसगढ़ का कैलाश पर्वत भी कहा जाता है। लोगों की मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां पर तपस्या की थी, जिसके कारण इसे विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। बालोद में घूमने की जगह में यह स्थान केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी स्वर्ग है। भोला पठार करहीभदर नामक गांव से कुछ दूर अंदर में स्थित ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यहां से चारों तरफ घने जंगलों का मनोरम दृश्य मन को मोह लेता है। पहाड़ी की चोटी पर शिव मंदिर स्थापित है, जो भक्तों को आकर्षित करता है।
चितवा डोंगरी गुफा पुरातात्विक स्थल: चितवा डोंगरी, बालोद शहर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, एक मनमोहक पर्यटन और पुरातात्विक स्थल है। जो आदिमानव की संस्कृति के बारे में भी बतलाती है। यहां पर गुफा के अंदर ड्रैगन और मानव आकृति के शैल चित्रकारी भी मिले हैं । यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहाँ एक प्राचीन मंदिर है जो एक प्राकृतिक गुफा के अंदर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे एक सिद्ध क्षेत्र भी माना जाता है। यह स्थान बालोद में घूमने लायक जगह ढूंढने वाले लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है। चितवा डोंगरी की पहाड़ी से पूरा गोंदली डैम और आसपास का प्राकृतिक मनोरम दृश्य नजर आता है। वन विभाग सहित पुरातत्व विभाग ने इसके संरक्षण को लेकर प्रयास किए हैं। साथ ही स्थानीय ग्रामीण भी समिति बनाकर इस पुरातात्विक धरोहर की देखभाल करते हैं।
देव बावली मंदिर रानाखुज्जी:
बालोद शहर से लगभग 42 किलोमीटर दूर स्थित देव बावली मंदिर, प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का एक अद्भुत संगम है। यह स्थान चारों ओर से घने जंगलों से घिरा हुआ है, इस मंदिर में भगवान शिव की भव्य मूर्ति स्थापित है, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर के आसपास कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं, जो इस स्थान को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती हैं। बरसात के दिनों में यहां का नजारा और भी मोहक होता है।
किल्लेवाली माता और महामाया मंदिर दल्ली राजहरा: धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम, दुर्ग डोंगरी किल्लेवाली माता मंदिर, बालोद से 34 किलोमीटर और दल्लीराजहरा से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माता दुर्गा का यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। माता के प्रति अटूट विश्वास रखने वाले भक्त दूर-दूर से माता के दर्शन करने आते हैं। इसी मार्ग पर आगे अंतिम छोर पर महामाया गांव में पहाड़ी पर महामाया का मंदिर भी लोगों की धार्मिक आस्था का केंद्र बिंदु है।
जलेश्वर महादेव मंदिर
बालोद: बालोद शहर में जलेश्वर महादेव मंदिर न केवल एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक अद्भुत आकर्षण है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां आपको झीलनुमा तालाब के बीच में एक विशाल शिवलिंग देखने को मिलेगा। मंदिर का शांत वातावरण, प्राकृतिक सुंदरता और शिवलिंग की भव्यता इसे एक अविस्मरणीय अनुभव बनाती है। महाशिवरात्रि सहित सावन सोमवारी में यहां विशेष पूजा होती है। तो वही शाम को नगरवासी भी बड़ी संख्या में महाआरती में जुटते हैं।
कपिलेश्वर मंदिर समूह बालोद:
कपिलेश्वर मंदिर समूह, बालोद शहर के नयापारा में स्थित है। एक प्राचीन एवं भव्य धार्मिक स्थल है। यह मंदिर समूह 11वीं से 15वीं शताब्दी के बीच नाग वंश के शासकों द्वारा बनवाया गया था और अपनी अद्भुत वास्तुकला और शिल्प कला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ आपको 7 मंदिरों का एक समूह देखने मिलेगा, जो सभी प्राचीन पत्थरों से बने हुए हैं। इनमें से मुख्य मंदिर कपिलेश्वर शिव मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर का मुख पूर्व दिशा की ओर है और यह एक चबूतरे पर स्थित है। गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है, जो भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। बालोद नगर का भव्य रथ यात्रा पर्व यहीं से शुरू होता है। यहां एक पुरातात्विक बावली भी है। जिसकी अपनी खास विशेषता है।
श्री पाटेश्वर धाम जामड़ी:
बालोद शहर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित श्री पाटेश्वर धाम, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का एक अद्भुत संगम है। 108 फीट ऊंचा, लाल पत्थरों से बना हनुमान जी का भव्य मंदिर इस स्थान का मुख्य आकर्षण है। यहां आपको पंचमुखी हनुमान जी की अद्भुत प्रतिमा देखने को मिलेगी, जो भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। चारों तरफ घने जंगलों से घिरा यह स्थान मन को शांति और प्रकृति के करीब ले जाता है। वर्तमान में यहां मां कौशल्या का भव्य मंदिर भी बन रहा है। जिसे लाल बलवा पत्थरों से बनाया जा रहा है।
