धमतरी/ महासमुंद– पढई तुंहर दुआर के आज के हमारे नॉयक बने धमतरी जिले के नवाचारी शिक्षक रिंकल बग्गा, परंपरागत खिलौने बना कर बच्चों को शिक्षा से जोड़ते हैं। शा.प्रा.शाला धरमपुर(स.),संकुल-तेंदुकोना,विकासखंड-बागबाहरा,ज़िला-महासमुंद (छत्तीसगढ़) में जहां एक ओर कोरोना वैश्विक महामारी से पूरा विश्व जूझ रहा है। पूरे देश के विद्यालयों में ताले जड़े हैं, शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है, वही छत्तीसगढ़ शासन ने सीजी पोर्टल में पढ़ाई तुंहर दुवार को छत्तीसगढ़ के बच्चों के लिए बनाया। जिससे पढाई निरंतर जारी रहे। आज छत्तीसगढ़ के सभी शिक्षकों के द्वारा पढाई तुंहर दुवार के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई करवाई जा रही है। सभी विद्यार्थी पढ़ाई तुंहर दुवार पोर्टल से लाभान्वित हो रहे हैं। वही बहुत से शिक्षको ने अपने नित नए- नए शिक्षा के नवाचार से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जागृत कर रहे हैं।

इसी क्रम में महासमुंद जिले के धरमपुर शाला के शिक्षक रिंकल बग्गा ने ऑनलाइन कक्षा के माध्यम से बच्चों की पढाई करने की शुरुआत की। पर सभी बच्चों के पास मोबाइल फोन न होने के कारण शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा था, ऐसे में रिंकल बग्गा ने हार नही मानी और सभी बच्चों को पढ़ाने के लिए जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मोहल्ले कक्षा का संचालन किया गया। जो विगत 5 माह से जारी है। इस मोहल्ला कक्षा से लाभान्वित हो रहे है।

उनकी सफलता की कहानी लिखने वाले राज्य स्तरीय ब्लॉग लेखक विवेक धुर्वे ने बताया 30 जुलाई 2020 से विगत 5 माह से कक्षा धरमपुर ग्राम पंचायत सम्हर में मोहल्ला क्लास की शुरुआत की गई।

मोहल्ला क्लास के साथ-साथ गांव के सामुदायिक भवन में संग्रहालय और सुखमती नायक के घर में पुस्तकालय की भी शुरुआत की गई। संग्रहालय में बच्चों ने विभिन्न TLM और मॉडल्स बना के रखा है तथा पुस्तकालय का उपयोग बच्चो के साथ-साथ पालक एवं ग्रामवासी भी करते है। शिक्षक ने कहा हमने हर चुनौती को अवसर की तरह देखा।

कभी वृक्षारोपण तो कभी खेलगढ़िया के अंतर्गत तीरंदाजी प्रशिक्षण चलता रहा। हमारे लिए सबसे खुशी की बात ये रही कि स्वयं शिक्षा सचिव डॉ.आलोक शुक्ला और राज्य समग्र शिक्षा के सहायक संचालक डॉ. एम सुधीश का आगमन मोहल्ला क्लास में हुआ। जिन्होंने मोहल्ला क्लास,संग्रहालय, पुस्तकालय और तीरंदाजी प्रशिक्षण का अवलोकन किया।

20 मिनट हमारे कार्यक्रम के लिए तय थे फिर भी शिक्षा सचिव ने 1 घंटे 10 मिनट दिए। माताओ,बच्चों और शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों से विस्तार से बात किया। वर्तमान में बच्चों द्वारा toycathon 2021 के अंतर्गत बहुत से परंपरागत,गणित एवं विज्ञान,पर्यावरण,कबाड़,मिट्टी, लकड़ी,प्लास्टिक से बने खिलौना बनाए है, जिनका उद्देश्य अपनी परंपरा, इतिहास को समझना है तथा विषयों को समझने में सहयोग लेना है, जिसका ग्राम स्तर पर स्टाल लगाए जाना है।

इनका कहना है कोरोना काल में शिक्षा से कोई भी बच्चा वंचित न रहे यही हमारा उदेश्य है और इनके द्वारा कोविड-19 के सभी शर्त व नियमो का पालन करते हुए शिक्षा निरंतर जारी है और आगे भी जारी रहेगी ।
