मंच का मानना – केंद्र के तीन कृषि कानून से किसान अपनी मर्जी से फसल उगाने के लिये आजाद नहीं रह जायेंगे, एक देश एक कानून की बात करने वाली सरकार एक उपज एक भाव लागू करने के लिये तैयार नहीं है
गुंडरदेही – गुंडरदेही के साजा गांव में छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के बैनर पर किसानों और मजदूरों की बैठक हुई। जिसे संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष एड. राजकुमार गुप्त ने केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आजादी के पहले जो लोग कंपनी सरकार की गुलामी करते थे वही लोग आज देश को कार्पोरेट कंपनियों की गुलाम बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मोदी सरकार ने तीन कृषि कानून और चार श्रम कोड इसी मकसद से बनाया है, उन्होंने किसानों को आगाह करते हुए कहा कि अभी किसान अपनी मर्जी से अपने खेतों में कुछ भी फसल उगाने के लिये आजाद है। तीन कृषि कानून के बाद किसान कार्पोरेट कंपनियों के गुलाम बन जायेंगे और उनकी मर्जी के अनुसार फसल उगाने के लिये मजबूर हो जायेंगे और एक दिन ऐसा भी आयेगा जब किसान अपनी खेतों के मालिक नहीं बल्कि कार्पोरेट कंपनियों के नौकर बन जायेंगे। मंच के अध्यक्ष एड. राजकुमार गुप्त ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि अभी अलग अलग स्थानों और राज्यों में धान के बाजार भाव अलग अलग हैं घोषित न्यूनतम समर्थन की गारंटी कानून बन जाने से पूरे देश में धान का बाजार भाव एक हो जायेगा किंतु एक देश एक कानून की बात करने वाली सरकार एक देश एक भाव लागू करने के लिये तैयार नहीं है,
किसानों और मजदूरों को संबोधित करते हुए मंच के प्रदेश महासचिव पूरनलाल साहू ने कहा कि पूरे देश के किसान तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिये दिल्ली की सीमाओं में 50 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। 50 से अधिक किसानों की जान चली गई है लेकिन मोदी सरकार किसानों के प्रति असंवेदनशील और निष्ठुर बनी हुई है, किसानों और मजदूरों को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ श्रमिक मंच के राकेश कौशिक ने कहा कि जिस प्रकार राज्य सरकार धान के एमएसपी पर बोनस की राशि जोड़कर 25 सौ रू. के भाव से धान खरीद रही है। उसी प्रकार मनरेगा श्रमिकों को भी घोषित पारिश्रमिक में अतिरिक्त राशि जोड़कर 3 सौ रू. पारिश्रमिक देना चाहिये।
मंगलूराम बघेल ने कहा कि राज्य की सरकार की धान खरीदी नीति और अव्यवस्था के कारण किसानों को इस साल अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है । सभा में श्रीमती अश्वनी साहू और चुम्मन साहू के नेतृत्व में ग्रामीण कमेटी का गठन किया गया। जिसमें बसंती बाई, केवल साहू, जगनी बाई, लोकेश्वरी, गनेशिया, लक्की बाई, चमरू, भगतराम, महासिंह, रेखलाल, डोमेश्वरी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
