
बालोद/ रायपुर। आज 14 जनवरी मकर संक्रांति के दिन जगह जगह तिल दान व पूजा पाठ का दौर चला। लोगों ने इस मौके पर पतंग भी उड़ाई। इसी क्रम में शासकीय पूर्व बुनियादी प्राथमिक शाला शंकर नगर में बच्चों के साथ इस त्यौहार को मनाया गया। जिसमें बच्चों के द्वारा पतंग बनवा कर मकर संक्रांति पर कविता, भाषण ,निबंध की प्रतियोगिता करवाई गई। बच्चों ने पतंग उड़ा कर इस त्यौहार को उत्साह के साथ मनाया।

जिसमें विद्यालय के शिक्षक भी बच्चों के साथ शामिल होकर इस पर्व का आनंद लिया। शिक्षिका कामिनी साहू के द्वारा आसमान को छूती बहुरंगी पतंगों के बारे में बताया कि माना जाता है कि दुनिया में सबसे पहले पतंग का आविष्कार चीन में हुआ था और पतंग खुशी उल्लास आजादी और शुभ संदेश की वाहक है। एक छोटी सी पतंग एकता का पाठ भी सिखाती है।क्योंकि पतंग अकेले नहीं उड़ाई जाती कोई मांझा पकड़ता है तो डोर किसी और के हाथ में होती है। शिक्षिका ने बताया 14 जनवरी के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और दक्षिण भारत में तमिल वर्ष की शुरुआत इसी दिन से होती है इसलिए इसे पोंगल के नाम से जाना जाता है और उत्तर भारत में लोहड़ी और गुजरात में उत्तरायण केरल में पोंगल के नाम से मकर संक्रांति भी मनाया जाता है। इस प्रकार हमारा देश अनेकता में एकता का परिचायक है।

आज के शैक्षणिक गतिविधि के अंतर्गत बच्चों ने अपने मन की बातें शिक्षकों के साथ शेयर किया। शिक्षकों ने उनकी भावनाओं को समझा और शिक्षा के महत्व को समझाते हुए बच्चों के साथ उन्हें अपने शिक्षा को अनवरत रूप से जारी रखने का प्रण दिलवाया।
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मकर संक्रांति के पर्व पर पतंग उड़ाना सेहत के लिए विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है। हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक पक्ष नहीं है। लेकिन फिर भी सेहत को देखते हुए इस दिन पतंग उड़ाना अच्छा माना जाता है। अक्सर सर्दी के मौसम में लोग अपने घरों में कंबल में रहना पसंद करते हैं लेकिन उत्तरायण के दिन अगर कुछ देर धूप के संपर्क में रहा जाए तो इससे शरीर के कई रोग स्वतः नष्ट हो जाते हैं। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार उत्तरायण में सूर्य की गर्मी के प्रकोप व शीत के कारण होने वाले रोगों को समाप्त करने की क्षमता रखती है। ऐसे में घर की छतों पर जब लोग पतंग उड़ाते हैं तो सूरज की किरणे एक औषधि की तरह काम करती है। शायद इसलिए मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने का दिन भी कहा जाता है।
