रबर की तरह है इस बच्ची का शरीर! पर इरादे मजबूत, 90 % दिव्यांग रागिनी से आज छग के बच्चे ले रहे प्रेरणा, पढ़िये कैसे? उम्र 18 पर दिखती है 5 साल जैसी



सांकरा ज स्कूल की दिव्यांग छात्रा को पढ़ाई तुंहर दुआर में हमारे नायक के रूप में मिला स्थान

बालोद– पढई तुंहर दुआर स्कुल शिक्षा विभाग के पोर्टल में हमारे नायक में चयनित होकर दिव्यांग छात्रा कु रागिनी साहू ने बालोद जिले का मान बढ़ाया है जो सांकरा ज की रहने वाली है इस बच्ची का शरीर रबर की तरह है शरीर में मानो हड्डी ही नही है 90 फीसदी दिव्यांग व अजीब तरह की बीमारी की शिकार रागिनी ने कभी हार नहीं मानी है जिसके चलते आज स्कूल शिक्षा विभाग के जरिए उनकी प्रेरक कहानी को पढकर छग के अन्य बच्चे व शिक्षक भी प्रेरणा ले रहे हैं

विवेक धुर्वे राज्य ब्लॉग लेखक

कक्षा 12 वी में पढ़ रही रागिनी के हौसले और विश्वास को बताते हुए सांकरा ज हायर सेकेंडरी स्कूल के ही वाणिज्य के व्याख्याता व राज्य ब्लाग लेखक विवेक धुर्वे ने उनकी सफलता की कहानी लिखी है। प्रेरक कहानी के मुताबिक रागिनी ने अपनी पढ़ाई करने की जिद्द से इतिहास रच दिया है दिव्यांग बालिका कु रागिनी 12वी कला की छात्रा है जिन्होंने बचपन में विद्यालय में लेटकर अपनी पढ़ाई पूरी की बैठने में असमर्थ होने के बावजूद पढाई की जिद से कक्षा 12 तक का सफर बड़ी संघर्ष से गुजारा इनके माता पिता दोनो मजदूरी करते है व 3 बच्चों का पालन पोषण करके अपने बच्चों को पढाई के प्रति जागरूक करते है। कु रागिनी निरंतर कोरोनाकाल में घर में ही ऑनलाइन पढाई को निरंतर जारी रखी है।
90% दिव्यांग छात्रा जो बनी सबके लिए एक मिसाल
व्याख्याता विवेक धुर्वे ने कहा “अपने जीवन की डिक्शनरी से “दिव्यांग” और “विकलांग” शब्द निकाल दे. और दुनिया को दिखा दो आप वो कर सकते है जो सभी करते।” ऐसी ही बातों को रागिनी सार्थक कर रही है वह मानती है कि “अपने इरादों को इतना मजबूत रखना कि दिव्यांग से दिव्य बन जाओ. उन तमाम दिव्यांगो के लिए इक मिशाल बन जाओ जो निराशा के सागर में डूब जाते है” दीपक बोलता नहीं उसका प्रकाश परिचय देता है,ठीक उसी प्रकार आप अपने बारे में कुछ न बोलें,
अच्छे कर्म करते रहें बस वही आपका परिचय देंगे. जिनके अंदर सफल होने की हसरत हो और संघर्ष का हौसला जीवन में कभी भी कुछ भी उनके लिए असंभव नहीं रहता।
जो बचपन से ही 90% दिव्यांग है इस छात्रा ने कभी अपने आप को कमजोर लाचार नहीं समझा और हमेशा सामान्य इंसान की तरह अपने जीवन को जीने का प्रयास किया और उसमें सफलता भी पाई है। बस सहारे माता पिता बने उनके साथ अपने सपनो को निकल पड़ी पूरा करने में।

उम्र 18 पर शरीर से लगती है 5 साल की बच्ची


कु रागिनी साहू जो 18 वर्ष की है पर शरीर से 5 साल की बच्ची दिखती है,बचपन से 90% दिव्यांग बालिका जिनके माता पिता मजदूरी करके अपने 3 बच्चों का पालन पोषण करते है, बचपन से पढ़ाई के प्रति लगाव ने आज उसे कक्षा 12 वी तक ला दिया। ये इसकी लगन का ही नतीजा है, जो स्वयं चल फिर नही सकती अपनी माता पिता के गोदी में विद्यालय तक आती है व उसके लिए एक छोटी सी कुर्सी सभी विद्यार्थियों से हट कर लगाई जाती है। जिनका जीवन संघर्ष पूर्ण रहा है। सभी के लिए एक मिसाल बनी है। सभी बच्चों के लिए प्रेरणा का काम करती है। कक्षा में सबसे शांत,मिलनसार है।

ये है उनके शिक्षा का सफर
रागिनी की कक्षा पहली से पाँचवी तक की पढ़ाई शासकीय प्राथमिक विद्यालय ज/सांकरा में हुई। कक्षा छठवीं से आठवीं तक की पढ़ाई शासकीय मिडिल स्कूल ज/सांकरा, कक्षा 9 वी से वर्तमान में 12 वी कला की पढ़ाई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ज/सांकरा में जारी है।
ऑनलाइन कक्षा-वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन की पढई तुंहर दुआर की विषय सामग्री का अध्य्यन भी करती है। विद्यालय की ऑनलाइन कक्षा को नियमित जॉइन करती है।

इस क्षेत्र में भी है खास रुचि, पा चुकी सम्मान
चित्रकला व गायन,कंप्यूटर के प्रति लगाव है। शुरू से ही कंप्यूटर चलाने की ललक है व खुद का एक लैपटॉप रहे ये भी ख्वाईश है। कु रागिनी साहू का चयन राज्यस्तर पर गायन के तौर पर भुवनेश्वर में आयोजित हुआ था। जिसमे सफलता अर्जित करके नेशनल प्रतियोगिता में चयन हुआ। नई दिल्ली में विद्यालय के शिक्षक व प्राचार्य बताते है कि रागिनी शुरू से मेधावी रही है। गायन,चित्रकला, रंगोली में बहुत रुचि रही है। नेशनल गायन प्रतियोगिता में चयन-अपने गायन से राज्य से स्थान बनाने के बाद कु रागिनी का चयन राष्ट्रीय स्तर पर नई दिल्ली में हुआ था जहां से गायन की प्रस्तुति देकर सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया व सर्टिफिकेट प्राप्त किया व अपने राज्य व जिले का नाम रौशन किया।
पढाई-वर्तमान में कक्षा 12 वी कला की छात्रा है व कक्षा 10 वी में 69% अंक अर्जित की थी।शुरू से मेधावी छात्रा रही है।
जिला स्तर पर रंगोली प्रतियोगिता-
जिले स्तर पर रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त की थी। शुरू से बहुत ही सुंदर रंगोली बनाने में माहिर है। ब्लॉक व जिला स्तर चित्रकला प्रतियोगिता-ब्लॉक व जिले स्तर पर बहुत ही अच्छी चित्रकला का प्रदर्शन करके प्रमाणपत्र प्राप्त की। शुरू से चित्रकला में रुचि होने के कारण आज जिले तक अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी।

रागिनी का सपना ये है
एक वो मुकाम हासिल करने का जिससे अपने माता पिता का सहारा बन सके। आज वह खुद उनके सहारे जीवन यापन कर रही है। वह बड़ी अधिकारी बनकर अपने माता पिता के सपने साकार करना चाहती है। वह कहती है “डर मुझे भी लगा फासला देख कर,पर मैं बढ़ती गई रास्ता देख कर, खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई, मेरी मंजिल मेरा हौंसला देख कर”। माता पिता का कहना है बचपन से दिव्यांग होने के कारण कु रागिनी का जीवन संघर्ष शील बन गया है। जब दिमाग कमजोर होता है, तो परिस्थितयां समस्या बन जाती है लेकिन जब दिमाग स्थिर होता है, तो परिस्थितयाँ चुनौती बन जाती है और जब दिमाग मजबूत होता है, परिस्थितयाँ अवसर बन जाती है।

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