बालोद। आज विश्व एड्स दिवस है। इस दिवस पर हम बालोद जिले में एड्स को लेकर जागरूकता की बात करेंगे। लेकिन अफसोस जनक बात यह है कि लगातार बालोद जिले में एड्स के मरीज बढ़ते क्रम पर है। अलग-अलग क्षेत्रों से एड्स के मरीज निकल रहे हैं। किसी भी उम्र के लोग एड्स का शिकार हो रहे हैं। जो बताती है कि हम इस बीमारी को लेकर कितने गंभीर हैं। स्वास्थ्य विभाग के एड्स संबंधित नोडल अधिकारी डॉ संजीव ग्लैड के मुताबिक जिले में वर्तमान में 284 मरीज एक्टिव हैं। जिनका इलाज दुर्ग अस्पताल व जिला अस्पताल बालोद के समन्वय से चल रहा है। 6 महीने के अंतराल में मरीजों को दवाई दी जाती है। कई लोग रिकवर्ड हो चुके हैं। कई नए मरीज भी लगातार मिल रहे हैं। जिन्हें जागरूक करने के लिए लगातार विभाग द्वारा प्रयास किया जा रहा है।
काउंसलर की भी नियुक्ति

अस्पताल में इसके लिए काउंसलर की भी नियुक्ति की गई है। मरीजों की पहचान उजागर किए बगैर इसमें इलाज की सुविधा दी जाती है। कभी भी अस्पताल में एड्स शाखा में जाकर काउंसलर से मरीज तमाम जानकारियां हासिल कर सकते हैं। जब से जिला बना है तब से लगातार हर साल मरीजों की संख्या में 20 से 50 की संख्या में इजाफा होता आ रहा है। अब आंकड़ा 284 तक पहुंच गया है। खास तौर से युवा वर्ग व महिलाएं भी एड्स से पीड़ित हैं। इस बीमारी होने का मुख्य कारण असुरक्षित यौन संबंध ही माना जा रहा है। इसके अलावा अन्य कारणों से भी कुछ लोग एड्स का शिकार हुए हैं। विभाग द्वारा लगातार लोगों को जागरूक किया जाता है कि वे सावधानी बरतें। जिन जिन वजहों से एड्स का खतरा रहता है, उनके उपाय भी बताए जाते हैं।

लेकिन जरा सी चूक के चलते लोग इस बीमारी की चपेट में आते जा रहे हैं। जो चिंता का विषय बनी हुई है। नोडल अधिकारी डॉ संजीव ग्लैड का कहना है कि शुरुआती तौर पर दुर्ग जिला अस्पताल से इसकी दवाई दी जाती है। फिर 6 महीने बाद बालोद से ही इसका इलाज चलता रहता है समय-समय पर मरीज को दवाई लेनी रहती है। पूरी तरह से परहेज और नियमित दवाइयों का सेवन करने से एड्स से जंग जीती जा सकती है। जरूरत है तो लोगों को जागरूकता दिखाने की ताकि एड्स जिले से पूरी तरह से खत्म हो। पर वर्तमान परिदृश्य को देखें तो 284 मरीज अभी भी जिले में एड्स के हैं।एड्स नियंत्रण को लेकर शासन व विभागीय स्तर पर हर उपाय किए जा रहे हैं। इसमें लोगों की जागरूकता भी बहुत मायने रखती है। हम अपनी ओर से पूरा प्रयास करते हैं। लोगों में खासतौर से युवाओं में एड्स का खतरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।
