सचिव के आत्महत्या पर बिटाल सरपंच गंगाबाई पर लगे थे प्रताड़ना के आरोप, गई थी जेल, जज ने सुनवाई के बाद किया दोषमुक्त, पढ़िए कैसे आया यह फैसला?



बालोद। बालोद जिले के डौंडीलोहारा ब्लाक के ग्राम पंचायत बिटाल के सचिव युवराज निषाद द्वारा 12 मार्च 2021 को जहर पीकर आत्महत्या कर ली गई थी। जिस पर कुछ लोगों द्वारा सचिव परिवार के जरिए थाने में रिपोर्ट लिखवाई गई थी कि सरपंच गंगाबाई आर्य ने पंचायत में कुछ बात को लेकर विवाद के दौरान चप्पल निकालकर फेंक कर मारा था। जिससे क्षुब्ध होकर सचिव ने आत्महत्या की। मामले में काफी राजनीतिक तूल भी पकड़ा था। सचिवों ने आंदोलन तक किया था तो वहीं इसके बाद सरपंच के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें जेल भी भेजा गया था। उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण धारा 306 का मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में सुनवाई के बाद बालोद कोर्ट की जज प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सरोज नंददास ने सरपंच को आरोप से दोषमुक्त किया है। विभिन्न गवाहों के बयान और पूछताछ जिरह के बाद उन पर लगे आरोप साबित नहीं हो पाए और उन्हें दोषमुक्त किया गया।

देखिए कोर्ट में सुनवाई के बाद जज ने क्या निष्कर्ष दिया

साक्षी बुधारूराम, महेश राम एवं
विशाखा के प्रतिपरीक्षण में यह बात आयी है कि युवराज घटना के पहले लोन लेकर घर बना रहा था और उसकी अंतिम किस्त की अदायगी नहीं हुई थी और वह घटना के पूर्व से शराब पीता था। साक्षियों के कथनों से अभियुक्त द्वारा मृतक युवराज को जूती फेंककर मारना प्रमाणित नहीं है। यदि हम तर्क के लिये मान भी लें कि अभियुक्त गंगाबाई सचिव युवराज के मध्य मिटिंग में किसी प्रकार का वाद विवाद या हाथापाई या जूती से मारने जैसी घटना हुई है तब भी उक्त बातें प्रताड़ना की श्रेणी में नहीं रखी जा सकती, बल्कि मृतक के पास अभियुक्त के कृत्य के संबंध में समुचित व विधिक कार्यवाही करने का उपचार उपलब्ध था। इस प्रकार घटना के तुरंत पूर्व या घटना के समय सत्र प्रकरण क्रमांक 33 / 2021. छ.ग. राज्य विरुद्ध गंगाबाई आर्य मृतक युवराज को किस प्रकार प्रताड़ना दी गई. ऐसा साक्ष्य प्रकरण में उपलब्ध नहीं है। अभियुक्त व्दारा मृतक को आत्महत्या करने के लिये क्रियाशील सुझाव या उकसाने का शब्द का प्रयोग करने तथा अभियुक्त का कार्य भड़काने या प्रोत्साहित करने का आचरण साक्ष्य में उपलब्ध नहीं है। धारा 306 भा.दं.सं. व धारा 107 भा.दं.सं. के आवश्यक घटक को अभियोजन व्दारा साबित किया जाना आवश्यक है। यदि मृतक युवराज एवं अभियुक्त गंगाबाई के मध्य लड़ाई-झगड़ा हुआ भी है तो मात्र इतना कृत्य दुष्प्रेरण हेतु निश्चयात्मक प्रकृति की परिस्थितियां नहीं मानी जा सकती। अतः उपरोक्त साक्ष्य विवेचन के आधार पर अभियोजन यह तो प्रमाणित करने में सफल रही है कि दिनांक 11.03.2021 को युवराज की मृत्यु कीटनाशक दवाई के सेवन के कारण आत्महत्या करने से हुई थी। लेकिन अभियोजन यह प्रमाणित करने में असफल रहा है कि अभियुक्त मृतक युवराज के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार कर शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिये दुष्प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप युवराज कीटनाशक दवा का सेवन कर आत्महत्या कर लिया। परिणामस्वरूप अभियुक्त गंगाबाई आर्य पिता स्व. रामदयाल आर्य, उम्र 50 वर्ष, निवासी जाबुडवाही, वार्ड क्रमांक- 13, थाना- दल्लीराजहरा, जिला बालोद (छ०ग०) को भा.दं.सं. की धारा 306 भा.दं.सं. के दंडनीय अपराध से दोषमुक्त किया जाता है।

सरपंच संघ अध्यक्ष पोषण देवांगन ने कहा फैसले को सत्य की विजय

वहीं सरपंच को दोष मुक्त किए जाने पर निर्णय का स्वागत करते हुए डौंडीलोहारा सरपंच संघ के अध्यक्ष पोषण देवांगन ने इसे सत्य की जीत बताई। उन्होंने कहा कि गंगाबाई आर्य सरपंच ग्राम पंचायत बिटाल जनपद पंचायत डौंडीलोहारा जिला बालोद को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के आरोप से दोषमुक्त किया गया। 12 /3/ 2021 को युवराज निषाद सचिव ग्राम पंचायत बिटाल द्वारा आड़े झाड़ गाँव में जहर खाकर आत्महत्या करने के बाद बलवंत साहू उपसरपंच बिटाल द्वारा आत्महत्या करने का दुष्प्रेरित करने का झूठा आरोप लगाकर सरपंच को पद से मुक्त करने के लिए उसके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 306 पर अपराध पंजीबद्ध कर गिरफ्तार करवाया था एवं, राजनीतिक षड्यंत्र के द्वारा सरपंच पद से हटवाया दिया गया। गंगाबाई आर्य सरपंच बीटल के द्वारा उपसरपंच के विरुद्ध किए गए शिकायत पर पुलिस प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की सुनवाई नहीं किया गया जबकि गंगाबाई आर्य एक महिला जनप्रतिनिधि थी तथा आदिवासी, महिला होते हुए उनके आवेदन पर किसी भी प्रकार की सुनवाई नहीं किया गया है, जबकि पंचायत सचिव युवराज शराब पीने का आदी था एवं यह भी जानकारी में आया कि साहूकार का कर्जा था। आत्महत्या करने के 12 दिन पहले पंचायत बैठक में सरपंच के साथ सचिव द्वारा अपशब्द की भाषा प्रयोग करने के कारण जूती निकालकर फेंकी थी कहकर आत्महत्या करने की दुष्प्रेरित करने का आरोप लगाकर सरपंच के विरुद्ध झूठी कार्यवाही करवाने में सफल हुए थे। यह प्रकरण में अधिवक्ता एच एस देशमुख अभियुक्त की ओर से न्याय दिलाने के लिए सहयोग प्रदान किए थे। जिसका सरोज नंददास प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश बालोद जिला बालोद छत्तीसगढ़ द्वारा दोषमुक्ति का निर्णय घोषित किया गया।

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