DAILY BALOD NEWS

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देखिए हड़ताल से कितना पड़ा असर, दल्ली बीएसपी को कितना हुआ नुकसान, कितना उत्पादन प्रभावित, आगे क्या है रणनीति?

दल्लीराजहरा – केंद्र सरकार द्वारा श्रम कानून में किए गए संशोधन के खिलाफ एवं सेल कर्मियों के वेज रिवीजन तथा कृषि संसोधन के विरोध में केंद्रित ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार को दल्ली राजहरा  की सभी खदानों में शत प्रतिशत हड़ताल रही इससे प्रबंधन को 21 हजार टन लौह अयस्क का उत्पादन नुकसान हुआ उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनो द्वारा बुलाई गई हड़ताल का समर्थन करते हुए स्थानीय ट्रेड यूनियन एसकेएमएस, सीटू ,इंटक एवं सीएमएसएस यूनियन ने स्थानीय स्तर पर भी 26 नवंबर को पूर्ण हड़ताल की घोषणा की थी। घोषणा के अनुसार सभी ट्रेड यूनियन पदाधिकारियों ने राजहरा दल्ली, झरनदल्ली एवं महामाया खदानों में हड़ताल को सफल करने के लिए पुरजोर प्रचार प्रसार किया तथा 26 नवंबर को सभी खदानों के प्रमुख द्वारों पर मोर्चाबंदी की । सभी खदानों के मुख्य द्वार पर उपस्थित हड़ताली कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की जन विरोधी एवं मजदूर विरोधी नीति तथा सेल प्रबंधन द्वारा वेज रिवीजन नहीं किए जाने के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा सभी खदानों में पूर्ण रुप से कामकाज ठप कर दिया इसी दौरान शहीद वीर नारायण चौक में एकत्र आसपास क्षेत्र के किसानों एवं खदान के मजदूरों ने संयुक्त रुप से एक विशाल आम सभा का आयोजन किया इस आम सभा में  केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कामरेड जनक लाल ठाकुर, राजेंद्र बेहरा, प्रकाश क्षत्रिय, तिलक मानकर ,नगर पालिका अध्यक्ष शिबू नायर, व्यापारी संघ के शांतिलाल जैन ने सभा को संबोधित किया। उसके बाद लगभग 1 घंटे तक मुख्य मार्ग पर चक्काजाम करके सरकार को चेतावनी दी गई कि केंद्र सरकार की जन विरोधी एवं मजदूर विरोधी नीतियों को देश के मजदूर और किसान किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेंगे ।

इन मांगो को उठाया गया

इस बीच दल्ली राजहरा के विकास से हेतू 100 बिस्तर अस्पताल, केंद्रीय विद्यालय एवं बाईपास रोड की मांग को भी पुरजोर तरीके से उठाया गया , तथा कहा गया कि राजहरा के विकास के लिए सभी मजदूर संगठन एवं व्यापारी संघ मिलकर एक साथ आंदोलन करेंगे ।

ये चेतावनी दी गई है

 हड़ताल में खदान कर्मचारियों ने बेहद उत्साह के साथ हिस्सेदारी कर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने श्रम कानून में संशोधन से श्रमिक विरोधी प्रावधानों को नहीं हटाया और कृषि कानून को वापस नहीं लिया तथा प्रबंधन द्वारा जल्द वेज रिवीजन नहीं किया गया तो आगे खदान कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल में जाने के लिए तैयार हैं। हड़ताल के दौरान प्रबंधन द्वारा यूनियनों की बैठक बुलाकर बार-बार हड़ताल समाप्त करने की अपील की गई, लेकिन सभी यूनियनों ने हड़ताल के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रबंधन की अपील को खारिज कर दिया ।

ये रहे प्रमुखता से मौजूद

इस हड़ताल में दल्ली राजहरा की खदानों  मे शत प्रतिशत उत्पादन प्रभावित हुआ । हड़ताल को सफल बनाने में एसकेएमएस अध्यक्ष कमलजीत सिंह मान, राजेन्द्र बेहरा, गौतम बेहरा, तोरन लाल साहू, मनोज परीरा,अनिल यादव, सीटू से प्रकाश क्षत्रिय, पुरुषोत्तम सिमैया, ज्ञानेंद्र सिंह, विजय शर्मा, विनोद मिश्रा, मानसिंह कनवर, सुजीत मुखर्जी, राम कुमार साहू, चार्ली, इंटक से तिलक मानकर ,अभय सिंह, दिनेश, तेजेंद्र प्रसाद  सीएमएसएस से गणेश राम चौधरी, राजाराम बरगड,शैलेश कुमार, सहित सभी यूनियनों के सैकड़ों साथियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

क्या बोले अधिकारी- 21 हजार टन लौह अयस्क का उत्पादन नुकसान  

आइओसी राजहरा मुख्य महाप्रबंधक तपन सूत्रधार ने कहा की हड़ताल वापसी के लिए सभी यूनियन से अपील की गई थी जिसके लिए मीटिंग भी बुलाई गई थी खदान मजदूर संघ ने हड़ताल से अलग होने की बात कही थी पर आज की हड़ताल से आईओसी के सभी माइंस शत प्रतिशत बंद रहे तीनो शिफ़्ट मिलाकर बीएसपी को 21 हजार टन लौह अयस्क के उत्पादन नुकसान हुआ है।

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