बालोद/रायपुर – मौसम विभाग ने गुरुवार को दुर्ग संभाग यानी बालोद, दुर्ग व आसपास जिले में बारिश व तूफान का अंदेशा जताया है. कल सुबह से मौसम बदल सकता है. दक्षिण भारत में चेन्नई पांडुचेरी में यह तूफ़ान विगत दिनों से लगातार आफत मचा रहा है. अब यह छग की ओर बढ़ रहा है. जिससे बालोद जिले में भी असर रहेगा. राज्य मौसम विभाग के अनुसार रायपुर समेत प्रदेश के कुछ हिस्सों में निवार तूफान का असर देखने को मिल सकता है। गुरुवार को सुबह से प्रदेश में घने बादल छाए रहेंगे और और कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई जा रही है। इस तूफान से सबसे ज्यादा रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग प्रभावित होंगे। वहीं बिलासपुर संभाग और सरगुजा पर इसका प्रभाव नहीं के बराबर रहेगा। बादल आने से एक बार फिर गुरुवार रात से तापमान थोड़ा बढ़ सकता है। लालपुर मौसम विज्ञानी केंद्र के विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि तूफान के असर के दौरान प्रदेश में पश्चिम की तरफ से आने वाली हवा में नमी नहीं रहेगी लेकिन दक्षिण से हवा अपने साथ बादल लेकर आएगी । इस वजह से बारिश के आसार बन गए हैं। बंगाल की खाड़ी से निकला चक्रवात निवार अब एक भयंकर चक्रवाती तूफ़ान का रूप ले चुका है. मौसम विभाग के अनुसार अगले 12 घंटों में इसका भीषण असर छग में भी देखने को मिल सकता है. आइये इस रिपोर्ट में जानते हैं कि ये कितना ताकतवर है और इस तूफ़ान का कितना और कहां असर होगा. साथ ही आपको ये भी बतायेंगे कि तूफानों के नाम कैसे रखे जाते हैं.
कितना ताकतवर है निवार चक्रवात?
निवार चक्रवात उत्तरी हिंद महासागर में इस साल सक्रिय होने वाला चौथा चक्रवात है. इससे पहले गति, अम्फान और निसर्ग नाम के चक्रवात भी अपनी क्षमता के हिसाब से नुकसान पहुंचा चुके हैं. मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से निकला निवार 25 नवंबर को पुडुचेरी और तमिलनाडु के तटों तक पहुंच चुका है. जिसकी रफ़्तार 145-150 किलोमीटर प्रतिघंटे के आसपास है. तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और पुडुचेरी मंल तूफान से पहले बारिश हो रही है. चेन्नई में जारी भारी बारिश की वजह से कई जगहों पर भारी जलभराव हो गया है.
कैसे उठता है चक्रवात?
निवार का तिया-पांचा तो हमने समझा, मगर ये चक्रवात उठता कैसे है? दरअसल जब समंदर का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा होने लगता है तो खूब सारी भाप और गर्म होती हवा आसमान में ऊपर उठती है. अब जब हवा ऊपर जायेगी तो नीचे क्या रहेगा? तो नीचे की खाली जगह को लूटने चारों तरफ से हवाएं दौड़ी-भागी आती हैं. खाली जगह हथियाने के लिए हवाएं चिल्लम-चिल्ली मचाती हैं और भगदड़ मचती है.

अब ये गर्म हवा ऊपर ठंडी होने लगती है जिससे नमी से भरे बड़े-बड़े बादल बनते हैं. आसमान में ऊपर उठते बादल धरती के घूमने से पैदा होने वाले फ़ोर्स के चलते (जिसे कोरियोलिस फोर्स भी कहते हैं) गोल-गोल घूमने लगते हैं. हवा के इधर-उधर होने और बादल बनने का सिस्टम जब लगातार चलता है, तो बात सीरियस हो जाती है और एक तूफान का जन्म होता है. जितनी गर्मी और नमी होगी, तूफान उतना ही ज़ोर का होगा. यहां ये भी जानना ज़रूरी है कि इक्वेटर के ऊपर (माने उत्तरी गोलार्ध में) तूफान बाईं तरफ घूमते हैं और नीचे (माने दक्षिणी गोलार्ध में) तूफान दाईं तरफ घूमते हैं.
कैसे रखे जाते हैं नाम?
अब आप सोच रहे होंगे बाकी सब तो ठीक है लेकिन ये निवार, अम्फान टाइप के चौचक विदेशी नाम रखता कौन है. तो आपको बता दें कि हिंद महासागर में आने वाले तूफानों को नाम देने का चलन 2004 में शुरू हुआ. आठ देशों भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाइलैंड ने मिलकर नाम देने का एक फॉर्मूला बनाया. इसके मुताबिक, सभी देशों ने अपनी ओर से आठ-आठ नामों की एक लिस्ट वर्ल्ड मीटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (WMO) को दी. नाम देने लायक चक्रवात आने पर आठ देशों के भेजे नामों में से बारी-बारी एक नाम चुना जाता रहा. ‘अम्फान’ इस लिस्ट का आखिरी नाम था, जिसे थाइलैंड ने दिया था. इसके बाद हिंद महासागर में आने वाले अगले चक्रवात को नाम देने के लिए नई लिस्ट तैयार की गयी. IMD (इंडिया मीटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट) ने अप्रैल में ये लिस्ट जारी की थी. इस बार आठ पुराने देशों के अलावा पांच नए देशों के नाम भी शामिल किये गए थे. इरान, कतर, सऊदी अरेबिया, UAE और यमन. इन सभी देशों ने अपनी-अपनी तरफ से चक्रवातों के नाम सुझाए और 169 नाम डिसाइड भी कर लिए गए. निवार चक्रवात का नाम ईरान की ओर से भेजी गयी सजेशन्स में से एक है.
