यहां छत पर लग रही बच्चों की क्लास, शिक्षक के मार्गदर्शन में बच्चे बिखेर रहे ज्ञान की रोशनी, अर्जुन्दा में हो रही अनूठी पहल



छत पर खेल खेल में पढ़ते बच्चे

बालोद/अर्जुन्दा ।आज ऐसे स्कूल की बात करेंगे जो किसी मोहल्ले या गली या भवन में नहीं बल्कि छत पर लगता है। यह बच्चों का अनोखा स्कूल है, जिसे नाम दिया गया है छत की क्लास। यह स्कूल अर्जुन्दा में लगता है। जहां प्राइमरी से मिडिल तक के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। यह बच्चों की अनोखी कक्षा है जो रोज संचालित हो रही है। दरअसल में छत की क्लास का यह कॉन्सेप्ट उच्च वर्ग शिक्षक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अर्जुन्दा पुष्पा चौधरी का है। जिन्होंने स्कूल बंद होने के कारण शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए छत की तलाश शुरू की है। क्लास में रोज शाम को मोहल्ले के बच्चे इकट्ठा होते हैं और अलग-अलग गतिविधि करते हैं। बच्चों को छूट होती है कि वह किस क्षेत्र में क्या प्रतिभा दिखाने वाले हैं। सब अपने मन मुताबिक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। कुछ बच्चों को होमवर्क भी दिया जाता है ताकि वह अपनी प्रतिभा को बेहतर तरीके से निखार सके। शिक्षिका पुष्पा चौधरी का कहना है कि बच्चों को थोड़ी से समझाने की जरूरत होती है अगर उनमें सीखने की ललक हो तो ज्यादा देर नहीं लगती और हर तरह से अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं। बस उन बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने व परखने की जरूरत होती है।

यह सब होता है इस छत की क्लास में

शिक्षिका के इस छत की क्लास के दौरान बच्चों को योगाभ्यास, खेल खेल में पढ़ाई, गीत संगीत, मनोरंजक माहौल में सिखाया जाता है। बच्चों का मोहल्ला क्लास मोहल्ले के बजाय छत पर चलता है। जहां पर क्राफ्ट आर्ट, पेंटिंग और विभिन्न प्रकार की कलाकृति के साथ बच्चे अपनी प्रतिभा दिखाते हैं। बच्चे जब घर जाकर अपने पालक को इस बारे में बताते हैं तो उनकी भी सकारात्मक प्रतिक्रिया रहती है।

बड़े बच्चों को दी जाती है पर्सनालिटी डेवलपमेंट की शिक्षा

क्लास सिर्फ प्राइमरी मिडिल के बच्चों तक नहीं सिमटा है बल्कि बड़े बच्चों के लिए भी लगती है। 12वीं के अलावा कॉलेज की पढ़ाई कर रही छात्राएं भी शिक्षिका पुष्पा चौधरी के घर आकर पर्सनालिटी डेवलपमेंट सिखती हैं। कैसे लोगों से बात करनी चाहिए, खुद की पर्सनालिटी को कैसे डेवलप करना चाहिए, यह सब बातें छात्राओं को सिखाई जाती है।

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