परसदा प्राइमरी और मिडिल स्कूल में युवाओं ने पेश की अनूठी मिसाल
वहीं शिक्षकों के हड़ताल से पालकों में नाराजगी बढ़ी
बालोद। अनिश्चितकालीन हड़ताल के अंतर्गत अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन में शिक्षक साथी भी कूद पड़े हैं। और इसके चलते खासतौर से प्राइमरी, मिडिल स्कूलों में बिना शिक्षक के पढ़ाई ठप हो गई है। जिसका असर देखने को मिल रहा है। बच्चे और पालक अपनी पढ़ाई को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं तो दूसरी ओर ग्राम पंचायत परसदा ज के युवा पढ़ाई की बागडोर संभालने में जुट गए हैं। यहां के युवाओं ने तय किया है कि वे रोज 1 से 2 घंटा अलग-अलग कक्षाओं को पढ़ाने के लिए स्कूल आएंगे। इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। यहां के प्राइमरी स्कूल में 87 व मिडिल में 75 बच्चे अध्ययनरत हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है दोनों स्कूल के कुल 6 शिक्षक हड़ताल पर चले गए हैं। ऐसे में आगामी तिमाही परीक्षा को लेकर भी पूरी तैयारी नहीं हो पा रही है। सिलेबस पिछड़ा है। इसे देखते हुए सरपंच द्रौपती घुराउ गंगबेर ने गांव के युवाओं को प्रेरित किया और उन्हें पढ़ाने के लिए राजी किया। बुधवार को स्कूल परिसर में एक संक्षिप्त बैठक बुलाई गई। जिसमें गांव के युवाओं ने स्वप्रेरित होकर बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठाने की बात कही। इस दौरान उपसरपंच टुमन कौशिक, ग्राम पटेल भाव सिंह रोहित साहू, लोमन साहू सहित अन्य भी मौजूद रहे।
पालकों में बढ़ा इस हड़ताल से आक्रोश, कहने लगे शिक्षकों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते तो पता चलता
लगातार हड़ताल से शिक्षा की व्यवस्था ठप होने से पालकों में आक्रोश बढ़ने लगा है। पालकों का कहना है कि एक तो जैसे तैसे कोरोना काल के बाद स्कूल खुले हैं। उस पर अब हड़ताल से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पालकों ने कहा कि ज्यादातर शिक्षकों के बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई करते हैं। उन शिक्षकों को हड़ताल में जाने से बच्चों की पढ़ाई का नुकसान क्या होता है यह तब पता चलता जब उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते । लेकिन उन्हें इस हड़ताल से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। क्योंकि उनके बच्चों की पढ़ाई तो आराम से प्राइवेट स्कूलों में हो रही है और यही वजह है कि हजारों रुपयों का वेतन होने के बावजूद शिक्षक गण महंगाई भत्ता सहित अन्य मांगों को लेकर हड़ताल में कूदे हुए हैं। उन्हें अपने स्कूल के बच्चों का भविष्य सवारने की फुर्सत ही नहीं है। ऐसे में गांव के युवाओं का पढ़ाई के लिए आगे आना निश्चय ही अनुकरणीय बात है।
शिक्षकों के नाम सार्वजनिक पत्र भी लिख रहे पालक गण
जब से दोबारा अनिश्चितकालीन हड़ताल में शिक्षक गण शामिल हुए हैं तब से इंटरनेट मीडिया में भी शिक्षकों की किरकिरी होने लगी है। बेलमाण्ड सहित कुछ गांव के लोग तो खुले तौर पर ज्ञापन देकर शिक्षकों के हड़ताल का विरोध कर रहे हैं। शासन प्रशासन से मांग की जा रही है कि उन्हें नौकरी से हटाकर उनकी जगह अन्य बेरोजगारों को रखा जाए। इस तरह की मांगे भी उठने लगी है। ग्राम चिचबोड के रहने वाले गिरिराज साहू ने भी इसी तरह से एक पत्र छत्तीसगढ़ी में लिखकर कहा है कि उन शिक्षकों तो क्या तकलीफ होगी क्योंकि उनके बच्चे तो सरकारी स्कूल में पढ़ते भी नहीं है।
परसदा में इन युवाओं ने संभाली जिम्मेदारी
परसदा के प्राइमरी और मिडिल स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां के स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई करके बैठे युवाओं ने पढ़ाई का जिम्मा संभाला है। जिसमें प्रमुख रुप से माधुरी चौधरी, मोहित कुमार, मनीष खरे शामिल है। छात्र छात्राओं में शामिल कक्षा नायक आकांक्षा, मोहित, कोनाक्षी, ढलेश्वरी तारम, विनीता , साक्षी, प्रियंका आदि ने बताया कि विगत 2 दिन से पढ़ाई ठप है। हम सिर्फ सुबह स्कूल आते हैं। 11 से 12 बजे तक मध्यान भोजन करके घर चले जाते हैं। एक भी शिक्षक नहीं है। सभी हड़ताल पर चले गए हैं। ऐसे में भला हमारे भविष्य का क्या होगा इस बात की चिंता है। ये तो अच्छा है कि गांव के हमारे युवाओं ने हमें पढ़ाने में आगे आने की बात कही है। तो स्कूल में स्वीपर अटेंडेंस लेते हैं। मध्यान भोजन वाले अपना काम करते हैं लेकिन हमारी पढ़ाई नहीं हो पा रही है। अब युवाओं के इस प्रयास से पढ़ाई पटरी पर आने की उम्मीद जगी है।
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