DAILY BALOD NEWS

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आत्मानंद के साथ जरा इधर भी देख लो सीएम साहब,,,, सीबीएसई पैटर्न पर आधारित बालोद शहर का पहला सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल बंद होने की कगार पर, शिक्षक बिना बच्चों का भविष्य अधर में लटका

पालक कर रहे आंदोलन की तैयारी, बैठक लेकर बनी रणनीति

बालोद। इन दिनों जहां कांग्रेस सरकार आत्मानंद स्कूलों पर फोकस कर हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलने में ध्यान दे रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा शासन काल के समय खुले हुए सीबीएसई पैटर्न के अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। जिसके चलते स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।ऐसी ही एक दुर्दशा हो गई है बालोद नगर के कुर्मी पारा में संचालित प्राइमरी स्कूल की। जहां 200 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि स्कूल को बंद होने से बचाने बच्चों का भविष्य बनाए रखने के लिए पालकों में दो महिलाएं कृतिका बिझेकर और कुनिका श्रीवास्तव जहां पढ़ाने के लिए पहुंच रही है। वे स्वेच्छा से यहां पढ़ा रही हैं। स्कूल में शिक्षक की समस्या को देखते हुए यहां शनिवार को एक आवश्यक बैठक रखी गई थी।

जिसमें शिक्षक पालक समिति का पुनर्गठन तो हुआ साथ ही शिक्षक की कमी को लेकर गंभीर चर्चा हुई और आगे रणनीति तैयार की गई कि अगर कमी दूर नहीं हुई तो पालक आंदोलन करने को विवश होंगे। कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को यहां की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। बैठक में शामिल वार्ड के पार्षद निर्देश पटेल ने बताया कि स्कूल 2018 से सीबीएसई अंग्रेजी माध्यम के तहत संचालित है। जहां अभी कुल 3 शिक्षक है। उसमें भी एक शिक्षिका बघमरा स्कूल के नाम से अटैच में है। 3 शिक्षकों की बहुत ही आवश्यकता है। स्कूल में अभी 200 बच्चे हैं। जिस हिसाब से शिक्षक कम है। ऐसे में अच्छे भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। जल्द से जल्द शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए। बैठक में शिक्षक गण, शाला प्रबंधन समिति सहित जनप्रतिनिधियों व पाठकों के बीच इस पर चर्चा हुई व आगे जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन देने की योजना बनाई गई है। स्कूल के प्रधान पाठक बीएस रामटेके का कहना है कि हम मामले की जानकारी अधिकारियों को दे चुके हैं। स्कूल 2018 से चल रहा है। शिक्षक की कमी है बच्चों की दर्ज संख्या ज्यादा हो गई है। 5 कक्षाएं हो गई है उन्हें पढ़ाने में दिक्कत होती है। एक शिक्षक प्रधान पाठक का कार्य तो विभागीय काम में निकल जाता है। 2 शिक्षकों को पांच कक्षा संभालना मुश्किल होता है। बैठक लेकर पालकों को यहां की समस्या के बारे में बताया गया है। दो पालक स्वेच्छा से यहां पढ़ाने के लिए आ रहे हैं।

पांचवी कक्षा में बिना पुस्तक के पढ़ाई

स्कूल की विडंबना ही कहे कि कहने को तो यह भी सरकारी स्कूल है। पर सीबीएसई पैटर्न पर संचालित है। जहां एनसीईआरटी की पुस्तकें प्राप्त होती है। इन पुस्तकों को पहुंचाने का जिम्मा भी छत्तीसगढ़ सरकार का ही होता है। एनसीईआरटी को सरकार फंड देती है। बदले में पुस्तकें प्राप्त होती है। लेकिन इस सत्र से यहां पांचवी कक्षा शुरू हुई है और उनके लिए पुस्तक ही नहीं है। एक से 4 तक के बच्चे भी कई मर्तबा पुराने पुस्तकों से ही काम चला रहे हैं। वार्ड वासी पालक चिंतित है कि अगर स्कूल में यही स्थिति रही तो वह बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे। वार्ड में ही अंग्रेजी माध्यम स्कूल 2018 से खुला था तो लोगों में इस बात की खुशी थी कि अब उन्हें प्राइवेट स्कूल में नहीं भेजना पड़ेगा और अधिकतर सरकारी स्कूल के बच्चे भी यहां एडमिशन लेकर पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ बच्चे जो पहले प्राइवेट में जाते थे वह भी अब यही दाखिला लेकर पढ़ रहे हैं। ऐसे में इस स्कूल की नजरअंदाजी पालकों में नाराजगी का कारण बन रही है।

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