4X- शिक्षण कार्यक्रम- बच्चों में पर्यावरण सम्बंधी समझ पैदा करने के लिए प्रथम ने किया ग्रामीण प्लास्टिक कचरे पर अध्ययन, जुटाई गई जानकारियाँ जुलाई 2022 में जारी होंगी



देश के 15 राज्य के 70 जिलों में हुआ अध्ययन, बालोद भी इसमें शामिल

बालोद। प्रथम संस्था ने देश के ग्रामीण इलाकों में ठोस कचरे के निपटारे की व्यवस्था को समझने के लिए एक खोज अध्ययन किया है। यह अध्ययन प्रथम की परियोजनाओं से जुड़े गांवों में मई 2022 में किया गया, जिसे प्रथम से जुड़े 700 कर्मियों व स्वयंसेवकों द्वारा किया गया। इसमें देश भर के 15 राज्यों के 70 जिलों में फैले 700 गांवों के 8400 परिवारों को शामिल किया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ से बालोद जिला भी शामिल है।
अध्ययन के आँकड़े जुटाने में परिवारों, स्कूल, ढाबों खोमचों व अस्पताल जैसी संस्थाओं के अलावा गांव के कबाड़ियों व ग्राम पंचायत सदस्यों की भी मदद ली गई।

जानिए इस अध्ययन का उद्देश्य क्या था-

ग्रामीण भारत में प्लास्टिक कचरे के विविध पहलुओं को समझना ताकि प्रथम की ओर से भारत के ग्रामीण बच्चों के लिए लर्निंग फॉर लाइफ का पाठ्यक्रम तैयार किया जा सके। पर्यावरण अध्ययन (ईवीएस) भारत में बच्चों के पाठ्यक्रम का औपचारिक हिस्सा है। इस खतरे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि पर्यावरणीय अध्ययन भी अन्य विषयों की तरह किताबी ज्ञान बनकर रह जाए। प्रथम का लर्निंग फॉर लाइफ पाठ्यक्रम जल्द ही एक कार्यक्रम शुरू करेगा ताकि देश के ग्रामीण बच्चे इसके 4- एक्स फ्रेमवर्क का इस्तेमाल करते हुए पर्यावरण के बारे में समझ बना सकें।

समझिए क्या है ये 4-एक्स

  • एक्सपोज (जानो), एक्सप्लोर (खोजो), एक्सपेरिमेंट (प्रयोग करो) और एक्सचेंज (बांटो)। इसके अंतर्गत सबसे पहले बच्चे जानकारियाँ हासिल करेंगे, फिर उन्हें अपने गाँव में मुद्दे को खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और वे संभावित समाधान के लिए प्रयोग करेंगे। अंत में वे अपने अनुभवों को औरों के साथ बांटेंगे।

इस अध्ययन से हासिल प्रेक्षणों व निष्कर्षों को एक पाठ्यक्रम के रूप में बुना जाएगा ताकि बच्चों को विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक व उनसे पैदा होने वाली संभावित समस्याओं तथा तमाम तरह के प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के तरीकों से परिचित कराया जा सके। प्राप्त आंकड़ों का प्रारम्भिक विश्लेषण बताता है कि पॉलिथीन थैलियों, प्लास्टिक रैपर, शैसे आदि एकाधिक परतों वाले व लचीले प्लास्टिक उत्पादों का बड़ा हिस्सा दूसरे घरेलू कचरे के साथ जला या मिला दिया जाता है। 30% से भी कम परिवारों को प्लास्टिक जलाने के दुष्प्रभाओं की जानकारी है और ज़्यादातर ग्रामीण परिवार ऐसे प्लास्टिक उत्पादों को नियमित रूप से जलाते भी हैं। यह उम्मीद की जाती है कि 4-एक्स शिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण आबादी को इस समस्या के प्रति जागरूक करेगा और वे परिवार व गाँव के स्तर पर इस समस्या के निराकरण में हिस्सेदारी करने लगेंगे।

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