कुरदी का सरपंच बन गया किसानों का भागीरथी, जिस गांव में कभी नहीं पहुंचा था खरखरा मोहन्दीपाट का पानी, वहां भी अब तालाब लबालब,देखिए कैसे हुआ ये सब?



किसानों ने निजी जमीन देकर बनवाई अस्थाई नहर, वाटर लेवल हुआ रिचार्ज, ग्रामीणों में उत्साह

बालोद। बालोद से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक गांव है कुरदी ग्राम पंचायत। जहां के सरपंच संजय साहू को गांव के किसानों का भागीरथी कहा जाने लगा है। क्योंकि उन्होंने ऐसा कुछ काम किया है कि जो आज तक इतिहास में इस गांव में कभी नहीं हुआ था। गांव में कभी नहर के पानी से निस्तारी की सुविधा नहीं मिलती थी। तालाब सूख जाते थे पर यहां नहर का पानी नहीं पहुंच पाता था। पास के गांव डूंडेरा तक खरखरा मोहन्दी पाट नहर परियोजना का पानी आ पाता था। लेकिन इसके आगे नहर की कोई व्यवस्था नहीं थी। जिसके चलते कुरदी के तालाब सूखे रह जाते थे। बांध और तालाब खाली होते थे। इस साल भी यही स्थिति रह जाती। अगर सरपंच भागीरथ प्रयास कर गंगा की तरह उक्त नहर परियोजना के पानी को गांव के तालाब तक ना लाते। सरपंच संजय साहू के इस अनूठे प्रयास से पहली बार इस गांव में खरखरा का पानी गांव के बांध और तालाब में भर गया। जहां पहले सूखा था वहां अब लबालब नजारा है। इससे किसानों में भी जमकर उत्साह है। भूजल स्तर बढा है। जो विगत दिनों नीचे चला गया था।

170 परिवार से लोग जुटे नहर बनाने में

इस गांव के सरपंच सहित 170 ग्रामीणों के प्रयास से यह संभव हुआ। जो अब नहर का पानी गांव के तालाब में भर रहा है। तो इसमें सबसे अहम भूमिका उन 7 से 8 किसानों ने निभाई जिन्होंने अस्थायी नहर बनाने अपनी निजी जमीन पंचायत प्रशासन को सौंपी और उनकी जमीन को खोदकर नहर बनाकर पानी लाने का रास्ता दिया गया। सरपंच संजय साहू ने बताया कि कई घंटे तक दिनरात काम चला। हर घर से एक एक आदमी इसमें काम किए हैं। तो 170 लोग नहर नाली बनाने और सफाई में जुटे रहे। जेसीबी का भी सहारा लिया गया। बांध भर चुका है। तालाब भी लबालब है। एक और तालाब को भरा जा रहा है। वह भी कल तक भर जाएगा। पिछले मंगलवार से यह काम चालू हुआ था।

योजना में शामिल नहीं था गांव, पर सरपंच और किसानों की एकजुटता देख अधिकारी भी मान गए

योजना के तहत निस्तारी के लिए पानी लेने में कुरदी पंचायत शामिल नहीं था। डूंडेरा तक इसका पानी हमेशा की तरह आना था। लेकिन जब सरपंच संजय साहू व किसानों ने पेशकश रखी कि हम भी अपने गांव के तालाब तक पानी लाना चाहते हैं और निस्तारी की समस्या दूर करना चाहते हैं। तो अधिकारियों ने कहा कि वहां तक तो नहर ही नहीं पहुंची है। तो कैसे पानी देंगे। इस पर सरपंच और किसानों ने कहा कि हम अस्थाई नहर बना कर दिखाएंगे। फिर क्या था सरपंच और किसान जुट गए। निजी जमीन पर नहर खुदाई शुरू हो गई और देखते- देखते रास्ता बनते देख अफसरों ने भी हामी भर दी और कुरदी के तालाबों को भरने के लिए भी खरखरा मोहन्दी पाट नहर का पानी छोड़ दिया। किसान सहदेव वर्मा, सुखदेव वर्मा कुरदी सहित पूनमचंद डूंडेरा के किसानों ने भी अस्थाई नहर बनाने के लिए अपनी जमीन दी है।

सरपंच ने लिखित में दिया खेत बनाने आश्वासन

सरपंच ने किसानों सहित अफसरों को लिखित आश्वासन दिया है कि पानी पहुंचाने के बाद उनके खेतों में जो खुदाई हुई है उन्हें वापस भरकर खेत बना कर दिया जाएगा। ताकि वे आगामी सीजन में वहां खेती कर सके।

वाटर लेवल बढ़ा, गर्मी में राहत

कुरदी में पहली बार नहर पानी से तालाब भरने से किसानों में जमकर खुशी का माहौल है। गांव में वाटर लेवल बढ़ गया है। गांव वाले कह रहे हैं कि पहली बार किसी सरपंच के कार्यकाल में हमारे गांव में नहर का पानी पहुंचा है। इस भागीरथ प्रयास की आस पास के गांव में भी चर्चा हो रही है ।जब रात में गांव में पहली बार नहर का पानी आया तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं था। अब गर्मी के 2 महीने ग्रामीणों को कोई दिक्कत नहीं होगी।

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