उड़िया बस्ती में रेलवे ने शुरू की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, दुकानों को तोड़ा, अब घर की बारी
नपा अध्यक्ष सहित साथियों ने लगाया रेलवे पर दादागिरी का आरोप, खुद से खाली कर रहे लोग जगह, 3 दिन का मांगा समय
बालोद। पाररास रेलवे लाइन से लगे हुए उड़िया बस्ती में रेलवे द्वारा अपनी जमीन को खाली करवाने के लिए अब तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिसके तहत विगत दिनों से नोटिस देकर रेलवे ने आखिरकार बुलडोजर चढ़ा दिया है। और पहले चरण में बालोद की ओर लगे दुकानों को तोड़ा गया है।

जिसके बाद उड़िया बस्ती पर बुलडोजर चलने की तैयारी है। लेकिन लोगों द्वारा बिना व्यवस्थापन के तोड़फोड़ किए जाने का विरोध किया गया। लोगों के समर्थन में नगर पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा, साजन पटेल सहित अन्य साथी भी डटे रहे तो हिंद सेना के लोग भी मौके पर मौजूद रहे और इस कार्रवाई का विरोध करने लगे।

नगर पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा ने कहा कि तत्काल में कोई लिखित नोटिस जारी नही हुआ है। रेलवे के अफसरों को नोटिस दिखाने कहा तो वे नहीं दिखा पाए। कोई भी मकान, दुकान तोड़ने के पहले 24 घंटे पूर्व नोटिस देना जरूरी है। यह अलग बात है कि पहले से इन्हें जगह खाली करने नोटिस दिया गया था लेकिन तत्काल तोड़फोड़ किया जाना गलत है। हमने उनसे मांग की है कि जगह खाली करने के लिए लोगों को 3 दिन की मोहलत दी जाए। लोग खुद से सामान हटाना शुरू भी कर दिए हैं। इधर रेलवे के अफसर और पुलिस भी अतिक्रमण हटाने को लेकर डटे हुए थे।

तनाव की स्थिति निर्मित हुई । बालोद पुलिस भी मौके पर तैनात रही। अंततः लोगों को जगह खाली करनी पड़ रही है और लोग यहां से अपना सामान निकाल कर ले जा रहे हैं। कुछ किराए के घर में शिफ्ट हो रहे तो कुछ सड़क पर आ गए हैं। कुछ लोग रोशन नगर में खाली जमीन पर कब्जा करके खुले आसमान के नीचे तंबू लगाकर रहने लगे हैं तो कुछ सार्वजनिक भवनों में पनाह ले रहे हैं। 3 दिन के भीतर इस जगह को पूरी तरह से खाली कर लिया जाएगा। फिर यहां बुलडोजर चलाकर इस जगह को साफ किया जाएगा।

बिना व्यवस्थापन के ऐसा करना गलत है
वार्ड के नागरिकों ने विगत दिनों जनदर्शन में कलेक्टर के नाम से ज्ञापन देकर यह मांग की थी कि 30 परिवार जो कई पीढ़ियों से यहां निवासरत है उन्हें बिना व्यवस्थापन के खाली करवाना गलत है। इसका विरोध किया जा रहा है। जब तक वह दूसरी जगह शिफ्ट नहीं हो जाते उन्हें यहां से नही हटाने की मांग की गई थी। लेकिन रेलवे प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे अफसरों का कहना है कि पहले भी कई बार जगह खाली करने के लिए नोटिस दिया जा चुका है। वहां बोर्ड भी लगाया गया है। आने वाले दिनों में रेलवे की जमीन पर यार्ड सहित अन्य निर्माण कार्य होने हैं। दोहरी रेलवे लाइन भी प्रस्तावित है। जिसे देखते हुए यहां जगह आवश्यकता है और अपनी जमीन को खाली करवाने के लिए पुरजोर प्रयास में जुट गया है।

दिखा मार्मिक नजारा भी
वर्षों से रह रहे लोग आज व्यवस्थापन ना होने के चलते बेघर हुए और अपना बोरिया बिस्तर बांधकर चलने लगे। लोगों का कहना था कि वे गरीब परिवार से हैं। तत्काल जमीन मकान की व्यवस्था नहीं कर सकते। इसलिए पनाह लेने को निकले हैं। इधर स्थानीय जनप्रतिनिधि उनकी तकलीफ को दूर करने का प्रयास कर रहें। विधायक संगीता सिन्हा की जिला प्रशासन से सार्थक चर्चा हुई।

तो वही नगर पालिका अध्यक्ष ने भी मांग रखी कि इन्हें शासन की योजनाओं के तहत व्यवस्थापन किया जाए। शहर युवा कांग्रेस के अध्यक्ष साजन पटेल ने कहा कि लगभग 30 परिवार उक्त क्षेत्र में निवासरत थे जिन्हें हटाया जा रहा है और 18 लोग ऐसे हैं जो अति गरीब परिवार से हैं उन्हें शासन की योजना के तहत जमीन आवंटित करने का प्रयास किया जाएगा। रोशन नगर में उन्हें जमीन दिलाने को लेकर काम हो सकता है। इसके लिए हमने शासन प्रशासन से मांग भी की है।

सड़क पर बैठ गए थे लोग

जब बुलडोजर लेकर रेलवे की टीम उनके अवैध कब्जे में बनाए गए मकान को तोड़ने पहुंची तो लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया और सड़क पर ही बैठ गए। बुलडोजर को अंदर घुसने नहीं दिया गया। लोगों का कहना था कि हम तो कब्जा हटा ही रहे हैं कुछ वक्त दे दो ताकि हम अपना सामान निकाल ले। पर रेलवे के अधिकारी मानने को तैयार नहीं थे।

जिसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा सहित अन्य लोग भी यहां आ पहुंचे और लोगों के समर्थन में कुछ देर के धरने पर बैठ गए। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस बल आ गई। इलाका छावनी में तब्दील हो गया और कुछ घण्टे बाद मामला शांत हुआ। लोगों ने खुद से अपना सामान हटाना शुरू किया है।












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