बालोद। कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी गुरुवर्या निपुणाश्रीजी म. सा. की सुशिष्या प्रवचन प्रवीणा स्नेध्यशाश्रीजी म. सा. ने कहा कि
सिद्धि साधना से ही प्राप्त होती है। वज्रमुनि के जैसे साधना होनी चाहिए। वज्रकुमार ने जन्म लेते ही रुदन किया । रुदन (रोने) का कारण था कि उनके भावों में दीक्षा लेने का भाव था । जन्म लेते ही दीक्षा के भाव इसलिए आये क्योकि तिर्यग्जृंभक देव के भव में उन्होंने कंडरिक पुंडरिक नाम का 500 बार स्वाध्याय करते थे और एक बार के स्वाध्याय में 500 बार ‘दीक्षा’ शब्द आता था तो एक दिन में दो लाख पचास हजार बार ‘दीक्षा’ शब्द कहते थे । सिद्धि प्राप्त करने के लिए दीक्षा जीवन, साधु जीवन प्रयोगशाला है। बालोद श्री संघ के द्वारा दीक्षार्थी मयंक भाई लोढ़ा का स्वागत सम्मान किया गया। गुरूवर्या श्री ने मयंक भाई को कहा कि मयंक मतलब चंद्रमा होता है तो आपका संयम जीवन चंद्रमा के जैसा उज्जवल हो। आपका स्वभाव चंद्रमा के जैसा शीतल हो। छह काय के जीवों के हिंसा बिना सांसारिक आत्मा का जीवन नही चल सकता। परन्तु निंदा का पाप किए बिना सांसारिक लोगों का जीवन चल सकता है। परन्तु मन की चतुराई है हिंसा के पाप को कम करने का चिंतन करता है और निंदा का त्याग करने का नहीं सोचता । कम से कम भगवान गुरु उपकारी माता-पिता की निंदा तो कभी नही करना चाहिये । आगामी सप्ताह में कमरौद निवासी घनश्यामजी ज्योतिदेवी संकलेचा की सुपुत्री वैराग्यवती लब्धि संकलेचा की भव्य भागवती जैन दीक्षा के मंगल कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। 28 अक्टूबर गुरुवार कार्तिक वदि 6 को प्रातः काल कपड़े पर केशर छांटने का कार्यक्रम महावीर भवन बालोद (छ.ग.) में है। डॉ. प्रदीप जैन, अध्यक्ष जैन श्री संघ ने बताया लब्धि संकलेचा की दीक्षा आगामी 8 दिसंबर को मानस भवन रायपुर में संपन्न होने जा रही है।
आत्म साधना का राजपथ – सिद्धि, साधना से ही प्राप्त होती है
