किसान उत्थान समिति का गठन, मवेशियों और किसानों की समस्याओं का मिलकर होगा समाधान



गुंडरदेही ब्लॉक के 20 गांवों के किसान आए एक मंच पर, लावारिस पशुओं की व्यवस्था को लेकर बनी रणनीति

गुण्डरदेही। बालोद जिले के गुण्डरदेही ब्लॉक के विभिन्न गांवों के किसानों ने अपनी स्थानीय समस्याओं एवं मवेशियों से जुड़ी परेशानियों के समाधान के लिए एक अभिनव पहल करते हुए “किसान उत्थान समिति” का गठन किया है। इस समिति में विभिन्न गांवों के प्रमुख किसान एवं पंचायत प्रतिनिधि जुड़े हुए हैं।

इस संबंध में विगत दिनों आयोजित किसान सभा में निर्णय लिया गया कि किसानों की यह सामूहिक बैठक अब “किसान उत्थान समिति” के नाम से जानी जाएगी।


हर गांव में बनेगी किसानों की टीम

बैठक में तय किया गया कि प्रत्येक गांव में कम से कम पांच किसानों एवं संबंधित सरपंच को जोड़कर समिति का गठन किया जाएगा। समिति में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष जैसे पद नहीं रखे जाएंगे, बल्कि एक संयोजक अथवा सचिव के माध्यम से किसानों तक सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा।


लावारिस मवेशियों से फसल नुकसान रोकने बनाई गई योजना

किसानों ने निर्णय लिया कि आगामी 5 जुलाई तक सभी किसान अपने गाय, बैल एवं भैंसों को बरदिहा/चरवाहा के सुपुर्द करेंगे, ताकि लावारिस पशुओं के कारण होने वाले फसल नुकसान को रोका जा सके।

इसके साथ ही सभी किसान अपने पशुओं के सींगों पर नीले रंग का पेंट लगाएंगे, जिससे पशुओं की पहचान और चिन्हांकन में सुविधा हो सके।


जरूरत पड़ने पर समिति करेगी हस्तक्षेप

बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि किसी गांव के किसान अपनी समस्याओं का समाधान आपसी स्तर पर नहीं कर पाते हैं, तो किसान उत्थान समिति पहल कर समाधान का प्रयास करेगी।

समिति की अगली बैठक की जानकारी 26 मई को एसडीएम को दी जाएगी। साथ ही दिसंबर तक प्रत्येक माह समिति की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया।


जनप्रतिनिधियों को भी किया जाएगा आमंत्रित

किसानों ने निर्णय लिया कि समिति की बैठकों में जनपद सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्यों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाएगा, ताकि किसानों की समस्याओं का प्रशासनिक स्तर पर भी निराकरण हो सके।


20 गांवों के 80 से अधिक किसान हुए शामिल

बैठक में 80 से अधिक किसानों ने भाग लिया। इसमें प्रमुख रूप से भरदाकला के सरपंच एवं ग्रामीण अध्यक्ष क्रांति भूषण साहू, चीरचार के चुकेश्वर साहू, जनपद सदस्य अनिल सोनी सहित सिब्दी, बरबसपुर, गोडेला, चिरचार, भिलाई, ओडार, सकरी, देवसरा, खुरसुनी, खुर्शुल, मोहदीपाठ, बघेली, बोडेना, बहमनी, मटेवा समेत लगभग 20 गांवों के किसान उपस्थित रहे।

प्रत्येक गांव से पांच-पांच प्रमुख किसानों की टीम भी गठित की गई है।

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