बालोद। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में बालोद की विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीएससी/पॉक्सो) कृष्ण कुमार सूर्यवंशी की अदालत ने आरोपी रमेश मरकाम उर्फ अश्वनी उर्फ प्रदीप वर्मा (41 वर्ष) को अपहरण और दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए अलग-अलग अवधि की सजा और अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने पीड़िता को 5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी है।
न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपये अर्थदंड, धारा 87 के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपये अर्थदंड तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
घर से लापता हुई थी नाबालिग
विशेष लोक अभियोजक बसंत कुमार देशमुख के अनुसार, 31 अगस्त 2024 को नाबालिग घर से बिना बताए चली गई थी। देर रात तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन पीड़िता के पिता ने थाना बालोद में शिकायत दर्ज कराते हुए रमेश वर्मा पर संदेह जताया, क्योंकि वह मोटरसाइकिल लेकर गया था और उसका मोबाइल भी बंद था।
पुलिस ने जांच के दौरान रायपुर स्थित एक होटल से नाबालिग को आरोपी के कब्जे से बरामद किया।
जांच में हुआ दुष्कर्म का खुलासा
पीड़िता के बयान में आरोपी द्वारा कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाने की बात सामने आने पर पुलिस ने मामले में पॉक्सो अधिनियम सहित भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं जोड़ दीं। विवेचना पूरी होने के बाद 29 नवंबर 2024 को न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।
प्रकरण की विवेचना उपनिरीक्षक कमला यादव ने की, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक बसंत कुमार देशमुख ने प्रभावी पैरवी की। प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई। साथ ही पीड़िता के शारीरिक एवं मानसिक पुनर्वास के लिए पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना-2018 के तहत 5 लाख रुपये की सहायता राशि दिए जाने की अनुशंसा की।










