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आदिवासी महिला से जातिसूचक गाली-गलौज और मारपीट: महिला दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा

उपशीर्षक: बालोद एससी-एसटी विशेष न्यायालय का फैसला, घर में घुसकर मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी और धमकी देने के मामले में आरोपी महिला को सजा

बालोद। अनुसूचित जनजाति की एक महिला के घर में जबरन घुसकर जातिसूचक गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के मामले में बालोद के विशेष एससी-एसटी न्यायालय ने आरोपी महिला को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह निर्णय प्रधान विशेष एवं सत्र न्यायाधीश एस.एल. नवरत्न की अदालत ने 7 जुलाई 2026 को सुनाया।

न्यायालय ने आरोपी आरती जई (खन्ना), पति प्रांजल जई, निवासी टिकरापारा वार्ड क्रमांक 4, बालोद को भारतीय न्याय संहिता की धारा 331(6) सहपठित धारा 3(5) के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही धारा 324(2) सहपठित धारा 3(5) तथा धारा 115(2) सहपठित धारा 3(5) के तहत एक-एक माह के सश्रम कारावास एवं 500-500 रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई।

घर में घुसकर की मारपीट और जातिसूचक अपमान

विशेष लोक अभियोजक पुष्पदेव साहू के अनुसार, प्रार्थिया दुर्गेश्वरी ठाकुर ने थाना बालोद में दर्ज रिपोर्ट में बताया था कि 22 अक्टूबर 2025 की शाम आरोपी अपनी बेटी किंजल के साथ जबरन उसके घर में घुस गई। आरोप है कि दरवाजे पर लात मारकर प्रवेश करने के बाद आरोपी ने हॉकी स्टिक से प्रार्थिया और उसकी मां के साथ मारपीट की।

शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने दोनों महिलाओं के साथ जातिसूचक एवं अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया, जान से मारने की धमकी दी तथा बाल पकड़कर मारपीट की। घटना में घायल प्रार्थिया का जिला अस्पताल बालोद में चिकित्सीय परीक्षण कराया गया।

साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध

पुलिस ने मामले की जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।

सुनवाई के दौरान प्रस्तुत गवाहों, दस्तावेजों एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए उपरोक्त सजा सुनाई।

मामले की विवेचना उप पुलिस अधीक्षक बोनीफास एक्का एवं निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा ने की, जबकि शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक पुष्पदेव साहू ने प्रभावी पैरवी की।

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