डम्परों की आवाजाही से टूटी सड़कें, ग्रामसभा में प्रस्ताव नहीं होने का भी आरोप
अंडा। ग्राम कुथरेल में इन दिनों चल रहे तालाब खुदाई कार्य को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब खुदाई कार्य बिना पर्याप्त जनचर्चा और स्पष्ट ग्रामसभा प्रस्ताव के शुरू कर दिया गया, जिससे गांव में कई सवाल खड़े हो गए हैं।
अत्यधिक गहराई पर ग्रामीणों ने जताई चिंता
ग्रामीणों के अनुसार तालाब की खुदाई जरूरत से ज्यादा गहराई तक की जा रही है। उनका कहना है कि तालाब का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों और मवेशियों को जल सुविधा उपलब्ध कराना होता है, लेकिन अत्यधिक गहराई के कारण भविष्य में इसका उपयोग कठिन हो सकता है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि गहरे तालाब के कारण बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के डूबने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास कार्य में सुरक्षा मानकों और जनहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ग्रामसभा और स्वीकृति प्रक्रिया पर भी सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब खुदाई के लिए न तो विधिवत प्रस्ताव पारित किया गया और न ही ग्रामसभा में इसकी आवश्यकता और स्वरूप को लेकर व्यापक चर्चा की गई। इसे लेकर ग्रामीण प्रशासन से तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच की मांग कर रहे हैं।
पर्यटन भ्रमण को लेकर गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म
गांव में यह चर्चा भी जोरों पर है कि तालाब खुदाई कार्य से जुड़े हितों के बदले ग्राम पंचायत के सरपंच एवं पंचों को लगभग एक लाख रुपये खर्च कर विभिन्न पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया गया। हालांकि इस मामले की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
डम्परों से जर्जर हुई गांव की सड़कें

ग्रामीणों ने बताया कि तालाब खुदाई में लगे डम्परों की लगातार आवाजाही से गांव की कच्ची सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कई मार्गों पर आवागमन प्रभावित हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब खुदाई कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए, सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा क्षतिग्रस्त सड़कों की जल्द मरम्मत कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना या जनहानि की स्थिति उत्पन्न न हो।
संजय कुमार साहू की रिपोर्ट
