
बालोद। सेवा, अनुशासन और सामाजिक जागरूकता का अनूठा उदाहरण बन चुकी स्वयंसेवी सामाजिक महिला कमांडो आज अपने कार्यों के दम पर समाज में अलग पहचान बना चुकी हैं। बिना किसी वेतन, मानदेय या यात्रा भत्ते के केवल समाज सेवा की भावना से कार्य करने वाली महिला कमांडो गांधीवादी विचारधारा को अपनाते हुए लोगों के बीच जागरूकता का संदेश पहुंचा रही हैं। यही कारण है कि आज लोग उन्हें “चलती-फिरती पाठशाला” के नाम से भी पहचानने लगे हैं।
पद्मश्री शमशाद बेगम ने बताया कि महिला कमांडो का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था में सहयोग करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। महिला कमांडो लगातार हेलमेट पहनने के प्रति जागरूकता, यातायात नियमों का पालन, वाहन चालकों को समझाइश, बस में चढ़ने में असमर्थ बुजुर्गों की सहायता, तालाब से लौट रहे बुजुर्गों को सहारा देना, बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करना, परिवार में एकता और भाईचारे का संदेश देना, नशामुक्ति अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे कार्यों को पूरा कराने के लिए प्रेरित करना, जल संरक्षण, बालिका शिक्षा, मतदाता जागरूकता और सिविल डिफेंस जैसे अनेक सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि महिला कमांडो परिस्थितियों के अनुसार जहां भी जरूरत महसूस होती है, वहां अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं। हालांकि संसाधनों की कमी है, लेकिन सेवा का जज्बा उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

परसदा की महिला कमांडो कचरी बाई ने कहा कि समाज सेवा के ये कार्य उन्हें आत्मिक शांति देते हैं। यदि उनके प्रयासों से किसी एक व्यक्ति का भी भला हो जाता है तो वे अपने कार्य को सफल मानती हैं।
जेवरतला की महिला कमांडो भागबती ने बताया कि वे गांव-गांव घूमकर लोगों को जागरूक करती हैं। उनके गांव में महिला कमांडो का विशेष सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि उनका गांव हेलमेट वाला गांव बन चुका है, जिसके लिए पुलिस विभाग ने महिला कमांडो का सम्मान भी किया। यह उनके लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
बोरी की महिला कमांडो भीमेश्वरी सांडिल्य ने कहा कि महिला कमांडो बिना किसी स्वार्थ के केवल सेवा भावना से कार्य करती हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) और पुलिस अधीक्षक द्वारा महिला कमांडो का सम्मान किया जाना उनके लिए गर्व की बात है और इससे उन्हें समाज सेवा के लिए नई ऊर्जा मिलती है।
महिला कमांडो का यह अभियान आज केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सेवा, अनुशासन, सहयोग और जनभागीदारी का एक प्रेरणादायी मॉडल बनता जा रहा है। बिना किसी आर्थिक लाभ के समाजहित में किया जा रहा उनका कार्य अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।











