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साहड़ा देव भगवान की पूजा के साथ निभाई सदियों पुरानी परंपरा, रेंगाडबरी में पूरे साल के लिए चरवाहे को सौंपी गई मवेशियों की जिम्मेदारी

डौण्डी लोहारा। विकासखंड के रेंगाडबरी गांव में शुक्रवार को आस्था, परंपरा और ग्रामीण संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। गांव के ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाज एवं विधि-विधान के साथ साहड़ा देव भगवान की पूजा-अर्चना कर पूरे वर्ष गांव की गाय-भैंसों को चराने के लिए चरवाहे की नियुक्ति की।

ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से साहड़ा देव भगवान की पूजा कर गांव के मवेशियों की सुख-समृद्धि, सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। पूजा-अर्चना के पश्चात चरवाहे को पूरे वर्ष गांव की गाय-भैंसों की देखभाल एवं चराने की जिम्मेदारी औपचारिक रूप से सौंपी गई।

ग्रामीणों का मानना है कि साहड़ा देव भगवान की पूजा करने से मवेशियों की रक्षा होती है तथा जंगल में चराई के दौरान उन पर किसी प्रकार का संकट नहीं आता। यही वजह है कि गांव में यह परंपरा वर्षों से श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान फगुवा राम निषाद, ग्राम पटेल जयेश जैन, सरपंच पति, बुजुर्ग सुदामा राम, भंडारी बैगा, मदन माहला, रामगोपाल देशमुख, अश्वनी यादव, धनसिंग फरदिया, राजू यादव, महेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। पूजा-अर्चना के बाद सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया और गांव की खुशहाली एवं मवेशियों की सुरक्षा की कामना की गई।

रिपोर्ट : नेमन साहू, रेंगाडबरी

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