जहाँ कभी सीमित संसाधन थे, आज वहीं ऑनलाइन क्लास से तैयार हो रहे नवोदय और प्रयास के भावी विद्यार्थी
बालोद (गुरुर ब्लॉक)। कहते हैं कि बदलाव की शुरुआत सोच से होती है, और जब पूरा गांव एक साथ ठान ले तो असंभव भी संभव हो जाता है। बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक का छोटा सा गाँव कपरमेटा आज शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी ही प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभर रहा है, जहाँ सरकारी कर्मचारियों और ग्रामीणों ने मिलकर बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने का बीड़ा उठाया है।
सांस्कृतिक भवन बना डिजिटल क्लासरूम
गाँव का सांस्कृतिक भवन अब सिर्फ बैठकों या कार्यक्रमों का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों का डिजिटल स्कूल बन चुका है। यहाँ एलईडी टीवी और ऑनलाइन क्लासेस के माध्यम से बच्चों को आधुनिक शिक्षा दी जा रही है।
प्रतिदिन कक्षा 5वीं और 8वीं के विद्यार्थी यहाँ पहुँचकर पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चों को जवाहर नवोदय विद्यालय और प्रयास आवासीय विद्यालय जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। साथ ही Spoken English की नियमित कक्षाएँ भी संचालित हो रही हैं।
अब गाँव के बच्चे भी देख रहे बड़े सपने
पहले जिन बच्चों के लिए शहर जैसी शिक्षा सिर्फ सपना थी, आज वही बच्चे डिजिटल पढ़ाई के माध्यम से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन क्लासेस ने बच्चों में नई ऊर्जा और सीखने की ललक पैदा की है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब बच्चे सिर्फ पास होने के लिए नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने के लक्ष्य के साथ पढ़ाई कर रहे हैं।
सरकारी कर्मचारियों ने दिखाई अनोखी सामाजिक जिम्मेदारी
इस पूरे अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसे किसी बड़े संस्थान ने नहीं, बल्कि गाँव के कर्मचारियों और ग्रामीणों ने मिलकर शुरू किया है। सभी ने अपने स्तर पर सहयोग देकर शिक्षा को आंदोलन का रूप दिया है।
इस अभियान में ग्रामीण अध्यक्ष जागेश्वर खुरथ्याम, त्रिलोक सिन्हा, सहदेव राम यादव (इंडियन आर्मी), ढालेश्वर कुंजाम (एयर फोर्स), तोमेश्वर कोराम (बीएसएफ), शिक्षिका कुंती कुंजाम, शिक्षक गोपाल मंडावी एवं भुनेश्वरी नेताम विशेष योगदान दे रहे हैं।
देव यादव ऑनलाइन क्लासेस का मिल रहा मार्गदर्शन
बच्चों को बेहतर मार्गदर्शन देने में देव यादव ऑनलाइन क्लासेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऑनलाइन शिक्षण के जरिए बच्चों को सरल और रोचक तरीके से पढ़ाया जा रहा है, जिससे उनकी समझ और आत्मविश्वास दोनों बढ़ रहे हैं।
“बच्चों का भविष्य ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी”
ग्रामीण अध्यक्ष जागेश्वर खुरथ्याम ने कहा —
“हम चाहते हैं कि हमारे गाँव के बच्चे भी बड़े विद्यालयों में प्रवेश लें और अपने सपनों को पूरा करें। शिक्षा ही वह ताकत है जो पूरे समाज को बदल सकती है।”
अब दूसरे गाँवों के लिए बन रहा प्रेरणा केंद्र
कपरमेटा की यह पहल सिर्फ एक गाँव तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब आसपास के क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनती जा रही है। ग्रामीण एकता, सामाजिक जिम्मेदारी और शिक्षा के प्रति समर्पण का यह उदाहरण दिखाता है कि यदि समाज मिलकर प्रयास करे तो गाँवों में भी शिक्षा की क्रांति लाई जा सकती है।
