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अंगना मा शिक्षा दूसरा चरण- माता उन्मुखीकरण में दिखा नया उमंग और जोश

बालोद। अर्जुन्दा के आंगनबाड़ी वार्ड 15 में अंगना म शिक्षा अभियान के दूसरे चरण का प्रशिक्षण हुआ। माताओं में इस अभियान में जोश व उमंग नजर आ रहा है। आयोजन में इस अभियान की जिला नोडल अधिकारी शिक्षिका पुष्पा चौधरी ने माताओं को जानकारी दी कि छोटे बच्चों को खेल में घरेलू सामग्रियों से शिक्षा कैसे देना है। कोरोनकाल को दृष्टिगत रखते हुए हम घर पर ही बच्चों को बेसिक नॉलेज कराकर उनकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विकास कर सकते हैं।

नोडल अधिकारी पुष्पा चौधरी के द्वारा समस्त गतिविधियों को प्रदर्शित करके बताया गया। आयोजन में सभी माताओं का सहयोग मिला।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कामिनी निषाद द्वारा इस विषय पर और जानकारी दिया गया कि आंगनबाड़ी और प्राथमिक शाला में अध्ययन 1 ली से 3री तक के बच्चों को घर पर सिखाने से आने वाले समय में बच्चों को सुनना, बोलना,लिखना और पढ़ने में सरलता होगी।

सभी माताओं का इसमें सहयोग रहा और माताओं द्वारा घर पर गतिविधियों को दुहराकर वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। ज्ञात हो कि पुष्पा चौधरी, शिक्षक (एलबी) शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अर्जुन्दा, गुंडरदेही, जिला बालोद,,, जैसा नाम वैसा काम, पुष्प की तरह अपने प्रतिभा का सुगंध फैला रही पुष्पा को विभाग ने हाल ही नोडल अधिकारी बनाया है अब वह अंगना म शिक्षा की बागडोर संभाल रही हैं. उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार किए जा रहे हैं। जिसकी सराहना जिला सहित राज्य स्तर पर होती है।

वर्तमान में अंगना म शिक्षा को लेकर बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें जिला नोडल अधिकारी बनाया गया है। जिसके तहत उन्हें प्राथमिक स्तर के छोटे कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के माताओं को उन्मुखीकरण गतिविधियों को करवाने के लिए जिलेभर की जिम्मेदारी दी गई है। कोरोना काल में भी उनके शिक्षा और समाज सेवा के प्रयास अनूठे रहे हैं। उनके घर में छत की क्लास यानी छत पर ही स्कूल संचालित होता था। जो कि पूरे छत्तीसगढ़ में एक मॉडल के रूप में जाना गया। साथ ही स्वयं से ही घर पर मास्क सिलकर हजारों जरूरतमंद को वितरित किया। मिट्टी के खिलौनों के जरिए भी वे शिक्षा में नवाचार करते रहते हैं। जिसके चलते वे बच्चों के बीच चहेती शिक्षिका के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। कई बच्चे उनको अपने जीवन का एक बेहतरीन प्रेरणा स्रोत मानते हैं। इसके अलावा विभिन्न संगठनों व विभाग के द्वारा भी उनको सम्मान प्राप्त हो चुका है।

शिक्षा विभाग द्वारा संचालित पढ़ाई तुंहर दुआर पोर्टल में उनका चयन हमारे नायक के रूप में हो चुका है। मिट्टी के खिलौनों और विभिन्न प्रकार की अनुपयोगी सामग्री की मदद से शिक्षण को मजेदार और मनोरंजक बनाती हैं। बच्चों को शिक्षित करने के साथ-साथ योगा में भी उनकी विशेष रूचि है। कोरोना काल के दौरान डिजिटल तरीके से बच्चों को पढ़ाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई और ऑनलाइन कक्षा चलती रही। कोविड-19 महामारी के दौरान कई गांव में मास्क बांटकर सामाजिक भेदभाव से बचने, स्वच्छता और हाथ धोने के बारे में भी पाठ पढ़ाया।

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