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अच्छी पहल- अब तेंदूफल से भी बना सकेंगे जूस, एक डॉक्टर व छात्रा ने किया शोध

राज्यपाल ने की सराहना, बोली आदिवासियों को मिलेगा इसका बेहतर लाभ

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रायपुर। अब तेंदू फल से भी जूस बनाया जा सकेगा। इसकी शुरुआत एक डॉक्टर और छात्रा ने की है। इस शोध के साथ उन्होंने राज्यपाल से भी मुलाकात कर प्रेजेंटेशन दिया। उनके इस काम को देखकर राज्यपाल ने भी सराहा और कहा कि इससे आदिवासियों के जीवन में एक अहम बदलाव आएगा। जिस तेंदू फल को आदिवासी बीनकर नाममात्र कीमत पर बेच देते हैं उसका अब जूस बने लगेगा तो उसकी अच्छी मार्केटिंग होगी। तेंदू फल से भी अब आदिवासियों के आय का स्तर सुधरेगा।
राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से राजभवन में डॉ. आर.के. प्रजापति और शोध छात्रा सुश्री चंद्रशिखा पटेल ने मुलाकात कर तेंदूफल का जूस भेंट स्वरूप प्रदान किया। राज्यपाल ने कहा कि तेंदूपत्ता से रोजगार की प्राप्ति होती है। अब तेंदूफल के जूस से भी उनकी आय होने की संभावना बढ़ जाएगी। इस जूस को पेटेन्ट कराने के लिए आवेदन करें। साथ ही ट्राईफेड को इस उत्पाद के प्रोत्साहन तथा अच्छा बाजार उपलब्ध कराने के लिए आग्रह किया जाएगा। इससे आदिवासियों को रोजगार भी प्राप्त होगा और वे सशक्त होंगे। सुश्री चंद्रशिखा ने बताया कि तेंदूफल जंगल में रह जाता है। पेड़ से गिरने के पश्चात आदिवासी इसे 3 से 4 रूपए किलो में बेच देते है। अच्छा बाजार नहीं मिलने के कारण यह सड़ जाता है। उनके द्वारा 10 ट्रिटमेन्ट के साथ आर.टी.एस और 10 ट्रिटमेंट के साथ नेक्टर बनाने के लिए उपयुक्त रेसिपी का निर्माण लगभग 03 माह के अथक परिश्रम से सफल किया गया है। अब यह तकनीक विकसित हो गई है। इस तेंदूफल के जूस में विटामिन ए,ई,डी तथा शर्करा पाई जाती है। यह पौष्टिक होने के साथ-साथ गठिया, जोड़ों को दर्द में सहायक होता है

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