आपातकाल के उन ‘‘काले दिनों’’ को कभी नहीं भूला जा सकता जब संस्थानों को सुनियोजित तरीके से ध्वस्त कर दिया गया था-दीपा साहू



बालोद

आपातकाल की 46 वीं बरसी पर भाजपा ज़िला महिला मोर्चा अध्यक्ष दीपा साहू ने कांग्रेस की खूब निंदा की और आपातकाल के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले ‘‘सत्याग्रहियों’’ को याद किया दीपा साहू ने कहा कि आपातकाल के उन ‘‘काले दिनों’’ को कभी नहीं भूला जा सकता जब संस्थानों को सुनियोजित तरीके से ध्वस्त कर दिया गया था वहीं उन्होंने ने कहा कि देश पर आपातकाल थोपकर कांग्रेस ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की हत्या कर दी थी उन्होंने बताया कि देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच 21 महीने की अवधि तक आपातकाल लागू किया गया था। इंदिरा गांधी उस समय देश की प्रधानमंत्री थीं।
जिलाध्यक्ष दीपा साहू ने सभी से भारत की लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने के लिए हरसंभव प्रयास करने और संवैधानिक मूल्यों का पालन करने का प्रण लेने का आह्वान किया आपातकाल के काले दिनों को कभी नहीं भूला जा सकता। वर्ष 1975 से 1977 की अवधि ने देखा कि कैसे संस्थानों को सुनियोजित तरीके से ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘आइए, हम सब भारत की लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने और संविधान में प्रदत्त मूल्यों के अनुरूप जीने का प्रण लें गरीबी हटाओ’’ का नारा देने वाली कांग्रेस ने आपातकाल लागू कर गरीबों के मुंह का निवाला छीनने का घनघोर पाप किया था और उस दौरान सच्चाई के लिए उठने वाली हर आवाज पर जुल्म ढाये गये थे।

लीला शर्मा


महिला मोर्चा जिला महामंत्री लीला शर्मा ने कहा कि वर्ष 1975 में आज ही के दिन कांग्रेस ने सत्ता के स्वार्थ व अंहकार में देश पर आपातकाल थोपकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की हत्या कर दी थी उन्होंने कहा, ‘‘असंख्य सत्याग्रहियों को रातों रात जेल की कालकोठरी में कैद कर प्रेस पर ताले जड़ दिए गए थे। नागरिकों के मौलिक अधिकार छीनकर संसद व न्यायालय को मूकदर्शक बना दिया गया था एक परिवार के विरोध में उठने वाले स्वरों को कुचलने के लिए थोपा गया आपातकाल आजाद भारत के इतिहास का एक काला अध्याय है
महामंत्री संगीता चंद्राकर ने कहा कि ‘21 महीनों तक निर्दयी शासन की क्रूर यातनाएं सहते हुए देश के संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले सभी देशवासियों के त्याग व बलिदान को हमे आज की पीढ़ी को स्मरण कराना होगा आगे उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 में आज ही के दिन कांग्रेस ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए आपातकाल की घोषणा की थी जो भारत के महान लोकतंत्र पर काला धब्बा है।

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