EXCLUSIVE-यादें अतीत की- कभी थे बालोद स्टेट बैंक के कैशियर, मेहनत कर बने एसडीएम से आईएएस कलेक्टर, पढ़िए कोरोना से जान गंवाने वाले नवल सिंह मंडावी की अनसुनी कहानी



कोरोना से निधन के बाद गृहग्राम देवकोट में हुआ अंतिम संस्कार, उन्हें गुरू मानने वाले श्रद्धांजलि देने पहुंचे आबकारी मंत्री कवासी लखमा

बालोद। रिटायर्ड आईएएस नवल सिंह मंडावी( नेताम) का कोरोना से शुक्रवार को निधन हो गया। उनका इलाज रायपुर के रामकृष्ण अस्पताल में चल रहा था। जहां उनकी स्थिति सुधर नहीं पाई और वे चल बसे। उनका अंतिम संस्कार कोरोना गाइडलाइंस के साथ बालोद जिले के गुरुर ब्लाक के ग्राम देवकोट में हुआ। इस निधन पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व राज्यपाल अनुसुइया उइके ने भी शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी तो वही उनके गृह ग्राम में मृत आत्मा को श्रद्धांजलि देने के लिए आबकारी मंत्री कवासी लखमा भी पहुंचे। कवासी उन्हें अपना गुरू मानते थे।
स्वर्गीय नवल सिंह मंडावी प्रशासनिक सेवा के अंतिम पड़ाव में पड़ोसी जिले धमतरी में ही पदस्थ थे। जहां से वे रिटायर हुए थे। अप्रैल 2014 में धमतरी से 12वे कलेक्टर की सेवा देते हुए रिटायर हुए थे। जहां वे 1 साल 9 महीने तक पदस्थ रहे। इसके पहले वे नारायणपुर में भी कलेक्टर रह चुके थे। उन्होंने अपने जीवन में काफी संघर्ष और मेहनत भी किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि वे शुरुआत में वे बालोद में स्टेट बैंक में कैशियर का काम करते थे। जिसके बाद उन्होंने परीक्षा दिलाई और प्रशासनिक सेवा में आए। बालोद सहित कई जगह के एसडीएम रहे। धीरे धीरे उन्होंने और ज्यादा मेहनत की और आईएएस अधिकारी बने। 67 वर्ष की उम्र में उनका दुखद निधन हो गया। वे कोरोना की चपेट में आ गए थे ।

बेटे की हुई हाल ही में शादी

बताया जाता है कि 1 मई को देवकोट में उनके बड़े बेटे की शादी हुई। जिसके बाद 3 मई को रायपुर संतोषी नगर में गृह प्रवेश था। 4 मई को उन्हें थोड़ा तबीयत खराब जैसे लगा। तो वे खुद से अस्पताल में जांच करवाने के लिए गए। जहां उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। फिर उनका इलाज चलता रहा। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भी शिफ्ट हुए पर उनकी हालत ना सुधरी और निधन हो गया। उनके दो बेटे हैं नीरज और निखिल।

गांव में है 7 भाइयों का संयुक्त परिवार
तो वही बड़ी बात यह है कि देवकोट में नवल सिंह मंडावी का सात भाइयों का संयुक्त परिवार है। वह परिवार में तीसरे भाई थे। आज के समय में इतना बड़ा संयुक्त परिवार देखने को नहीं मिलता है। वे इस संयुक्त परिवार व्यवस्था से समाज के लिए भी एक आदर्श थे और लोग उनका उदाहरण देते थे। सात भाई और दो बहन के इस परिवार की मिसाले लोग आगे भी देते रहेंगे। पत्नी हेमलता नेताम हैं। वर्तमान में स्व नवल सिंह सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश महासचिव, छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा के प्रदेश अध्यक्ष व वीर मेला आयोजन समिति राजा राव पठार के संयोजक के अलावा छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा जिला बालोद के संरक्षक, आदिशक्ति मां अंगारमोती ट्रस्ट गंगरेल के संरक्षक भी थे। इस निधन पर छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा ने भी श्रद्धांजलि व्यक्त की। चूंकि उनका निधन कोरोना से हुआ था इसलिए ज्यादा भीड़ इकट्ठा नहीं होने दिया गया। प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी में कोरोना प्रोटोकॉल के तहत उनका अंतिम संस्कार गृह ग्राम देवकोट में हुआ।

क्या बोले कवासी लखमा

देवकोट जाते समय धमतरी में रुके थे लखमा

धमतरी जिले के पूर्व कलेक्टर और आदिवासी नेता नवल सिंह मंडावी के निधन के बाद प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कवासी लखमा ने बेहद दुख जताया है। एनएस मंडावी के अंतिम संस्कार में शामिल होने उनके गांव जाने से पहले लखमा धमतरी में रुके थे।आबकारी मंत्री लखमा ने कहा कि, जब एनएस मंडावी सुकमा एसडीएम थे। तब उन्होंने मुझे राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। उंगली पकड़कर राजनीति सिखाई और मुझ जैसे अनपढ़ को MLA बनाया। आज मैं जो कुछ भी हूं। एनएस मंडावी के कारण ही हूं। उनकी मौत से जो दुख हुआ है, वो मेरे पिता की मौत से भी नही हुआ था।

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