DAILY BALOD NEWS

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धान बोनस की अंतिम किश्त की राशि शेष तीन किश्तों से कम, किसानों के साथ छलावा – भाजपा

किसान ही नहीं हर वर्ग परेशान, संक्रमण काल में शराब दुकान धारा 144 से बाहर – कृष्णकांत पवार

बालोद
अंतिम किश्त की राशि को शेष तीन किश्तों से कम सरकार द्वारा जारी किए गए धान की चौथी किश्त को लेकर भारतीय जानता पार्टी ज़िला बालोद द्वारा सरकार पर हमला किया गया है। भाजपा ने इस अंतिम किश्त की राशि को शेष तीन किश्तों से कम बताया है। भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णकांत पवार ने कहा कि ये आरोप नहीं प्रमाणित तथ्य हैं कि चौथी किश्त में 20 प्रतिशत कटौती की गई, जो अस्वीकार्य है। यह किसानों के साथ धोखा है, जिसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। एक तरफ यहां की सरकार किसान हितैषी बनती है तो दूसरी तरफ किसानों के साथ छलावा कर रही है। भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णकांत पवार ने कहा कि धान खरीदी वर्ष 2019-20 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पतला धान के लिए 1835 रुपए प्रति क्विंटल और मोटा धान के लिए 1815 रुपए प्रति क्विटंल था। राज्य सरकार की घोषणा के अनुरूप प्रति क्विटंल 2500 रुपए की दर से प्रति एकड़ 15 क्विटंल धान खरीदा जाना निर्धारित किया था।
भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश मंत्री पवन साहू ने बताया कि पतला धान के लिए केंद्रीय सरकार के समर्थन 1835 रुपए के हिसाब से 665 रुपए अतिरिक्त राशि प्रति क्विंटल दिया जाना था। किसानों ने सरकार की अपील का सम्मान किया था। लेकिन अंतिम किश्त की जो राशि प्राप्त हुई है वो पुराने तीन किश्तों से कम है।

भाजपा ज़िला महामंत्री किशोरी साहू ने कहा कि एक तो 4 किश्तों में किसानों को उनका अधिकार दिया जा रहा है। अधिक उपयोगी होता यदि पूरी राशि किसान को एक साथ दी जाती। राजीव गांधी के नाम पर किसानों के साथ धोखा है।

प्रमोद जैन

महामंत्री प्रमोद जैन ने कहा कि किसानों को पूरी राशि तत्काल देनी चाहिए। यदि सरकार किसानों को उनके अधिकार से वंचित करती है तो छत्तीसगढ़ के किसान भी अपने हक की लड़ाई लडऩा जानते हैं और किसानों के साथ जो अन्याय किया जा रहा है उसका जवाब जरूर मिलेगा।

किसान ही नहीं हर वर्ग परेशान

राकेश छोटू यादव

भाजपा उपाध्यक्ष राकेश (छोटू) यादव, नरेश यदु, संध्या भारद्वाज, सुशीला साहू, त्रिलोकी साहू, ठाकुर राम चंद्राकर, कोषाध्यक्ष सुदेश सिह ज़िला मंत्री जयेश ठाकुर, शरद ठाकुर, नरेश साहू, शीतल नायक, संजय दुबे ने भी प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि यहां पर किसान ही नहीं हर वर्ग परेशान हैं। प्रदेश में धारा 144 लागू है परंतु शराब दुकानों में क्या संक्रमण नहीं फैलता? वहां पर क्यों छूट दी जा रही है। यहां की सरकार शराब को बढ़ावा दे रही है। महिलाओ के लिए अलग से शराब दुकान खोलना इससे हर वर्ग परेशान है। घरों में लोग आर्थिक मानसिक रूप से परेशान हैं और सरकार अपने मजे में है। पहले छत्तीसगढ़ को तो यहां की सरकार देखले फिर असम को समय दे।

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