जगन्नाथपुर/बालोद । ग्राम पंचायत जगन्नाथपुर के सरपंच अरुण साहू व गांव के युवाओं के माध्यम से यहां के मुक्तिधाम को संवारने का काम शुरू हो गया है। इसके अलावा गांव के बांध तालाब तट स्थित 11वीं शताब्दी के पुरातात्विक शिव मंदिर को संरक्षित करने का काम भी चल रहा है। मंदिर परिसर की साज सजावट की गई है। महाशिवरात्रि पर यहां वृहद आयोजन की तैयारी है। इसी तरह मुक्तिधाम को भी हरा-भरा करने की मुहिम जारी है। बालोद की तर्ज पर अब जगन्नाथपुर के मुक्तिधाम के प्रवेश द्वार पर दो यमदूत की मूर्ति लोगों को आकर्षित करेगी।

रविवार को उक्त मूर्तियों की स्थापना की गई। इसके अलावा मुक्तिधाम के भीतर परिसर में शिव शंकर भी कैलाश पर्वत के साथ स्थापित किया गया है।

श्मशान में शंकर का वास माना जाता है इसकी मान्यता पौराणिक कथाओं में भी है। इसलिए सरपंच अरुण साहू ने यह कदम उठाया है। बालोद सहित कई बड़े शहरों के मुक्तिधाम में ऐसा किया गया है। जिससे प्रेरित होकर उन्होंने भी श्मशान घाट में शंकर भगवान की मूर्ति लगाई है।
सरपंच अरुण साहू ने बताया कि बांध तालाब तट पर 11वीं शताब्दी की पुरातत्विक मूर्ति है। जिसे पुरातत्व विभाग ने सुरक्षित किया है लेकिन उनका देखभाल नहीं हो रहा था। तो वहीं यह मंदिर उजाड़ नजर आता था। जिसे देखते हुए हमने उसे संवारने का प्रयास किया और पुरातात्विक चीजों को बिना किसी छेड़छाड़ के उनके सामने हिस्से को सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। जिसमें आकर्षक गेट बनाया गया है। महाशिवरात्रि के दिन पूरे मंदिर परिसर को फूलों से सजा कर इस जगह का नए सिरे से या यूं कहें कि 11वीं शताब्दी के बाद अब फिर से इस शिव मंदिर को संरक्षित करने व नए सिरे से इस धार्मिक स्थल को निखारने का काम किया जाएगा। इस प्रयास में गांव के कई युवा भी श्रमदान कर रहे हैं।
