15 लाख में 1 एकड़ 60 डिसमिल जमीन का किया था सौदा, बयाना लेकर रची थी ठगी की साजिश
बालोद। जमीन की फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार कर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में बालोद पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने चंद घंटों के भीतर एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है, जबकि दूसरा आरोपी अभी फरार है जिसकी तलाश जारी है।

गौरतलब है कि इस मामले को डेली बालोद न्यूज़ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी तक पहुंच बनाई और पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन बेचने का किया सौदा
पुलिस के अनुसार ग्राम लाटाबोड़ निवासी डमेन्द्र कुमार गंजीर के नाम दर्ज लगभग 1 एकड़ 60 डिसमिल कृषि भूमि की फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार की गई थी। आरोपियों ने स्वयं को जमीन का वास्तविक मालिक बताकर ग्राम देवारभाट निवासी दंपति से जमीन का सौदा कर लिया था।
आरोपियों ने उक्त जमीन को 15 लाख रुपये में बेचने का समझौता किया और बयाने के रूप में 1 लाख 50 हजार रुपये प्राप्त कर लिए। साथ ही फर्जी ऋण पुस्तिका और इकरारनामा भी सौंप दिया।
फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही खुली पोल
जब खरीदार पक्ष को दस्तावेजों पर संदेह हुआ और जांच में ऋण पुस्तिका फर्जी निकली, तब मामले की शिकायत की गई। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि आरोपी हरिशंकर गजभिये और नरेन्द्र बहादुर सोनी ने मिलकर सुनियोजित तरीके से यह धोखाधड़ी की थी।
एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार

विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी नरेन्द्र बहादुर सोनी (40 वर्ष), निवासी खैरतराई को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार कर जमीन बेचने की साजिश स्वीकार की।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी जब्त किया है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
वहीं इस मामले का मुख्य आरोपी हरिशंकर गजभिये, निवासी परसोदा अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस टीम की भूमिका रही सराहनीय
मामले के खुलासे और आरोपी की गिरफ्तारी में निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा, प्रधान आरक्षक योगेश सिन्हा, आरक्षक लक्ष्मण एवं खिलेश नेताम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस की त्वरित कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना की जा रही है।
जमीन खरीदने वालों के लिए सबक
यह मामला उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो बिना राजस्व अभिलेखों की जांच किए भूमि खरीदने का सौदा कर लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जमीन खरीदने से पहले संबंधित तहसील कार्यालय से दस्तावेजों का सत्यापन अवश्य कराना चाहिए, ताकि इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
असली मालिक की शिकायत के बाद खुली पोल, 15 लाख में हुआ था सौदा, 1.50 लाख रुपये बयाना लेने का आरोप
बालोद। जिले के ग्राम लाटाबोड़ में कृषि भूमि की कथित फर्जी बिक्री का मामला अब पुलिस कार्रवाई के बाद और गंभीर हो गया है। जिस मामले में जमीन के वास्तविक मालिक डर्मेंद्र कुमार गंजीर ने फर्जी ऋण पुस्तिका के आधार पर उनकी भूमि बेचने की साजिश का आरोप लगाते हुए रजिस्ट्री रोकने की मांग की थी, उसी प्रकरण में बालोद पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। वहीं मुख्य आरोपी अब भी फरार बताया जा रहा है।
फोन कॉल से खुला फर्जीवाड़े का राज
डर्मेंद्र कुमार गंजीर ने शिकायत में बताया था कि 30 मई 2026 को उन्हें जानकारी मिली कि उनकी कृषि भूमि को कुछ लोग बेचने का प्रयास कर रहे हैं। पूछताछ में पता चला कि एक व्यक्ति स्वयं को डर्मेंद्र कुमार गंजीर बताकर जमीन का मालिक होने का दावा कर रहा था और खरीदार पक्ष को ऋण पुस्तिका दिखाकर सौदा कर चुका था।
जानकारी मिलने के बाद डर्मेंद्र कुमार ने पुलिस, तहसीलदार, उप पंजीयक, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर प्रस्तावित रजिस्ट्री रोकने तथा पूरे मामले की जांच की मांग की थी।
फर्जी ऋण पुस्तिका दिखाकर 15 लाख में किया गया सौदा
जांच में सामने आया कि आरोपी हरिशंकर गजभिये और नरेन्द्र बहादुर सोनी ने मिलकर डर्मेंद्र कुमार गंजीर के नाम की कथित फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार की। इसके बाद देवारभाट निवासी कमला वर्मा और उनके परिवार के साथ लगभग 15 लाख रुपये में जमीन बेचने का सौदा किया गया।
आरोप है कि सौदे के दौरान खरीदार पक्ष से 1 लाख 50 हजार रुपये बयाना भी लिया गया तथा इकरारनामा तैयार कर फर्जी ऋण पुस्तिका सौंप दी गई।
ऋण पुस्तिका में फोटो नहीं होने से हुआ संदेह
खरीदार पक्ष को तब संदेह हुआ जब ऋण पुस्तिका में फोटो नहीं मिला। पहचान संबंधी दस्तावेज मांगने पर कथित जमीन मालिक ने रजिस्ट्री के दिन फोटोयुक्त दस्तावेज दिखाने की बात कही। इसी दौरान वास्तविक भूमि स्वामी डर्मेंद्र कुमार गंजीर से संपर्क होने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ।
एक ही जमीन की दो ऋण पुस्तिकाओं पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनके नाम की मूल ऋण पुस्तिका पहले से मौजूद है, जबकि सौदे में उपयोग की गई दूसरी ऋण पुस्तिका संदिग्ध प्रतीत होती है। इससे दस्तावेजों की कूटरचना और संभावित मिलीभगत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बालोद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार
मामले की जांच के बाद बालोद पुलिस ने अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की। पूछताछ में आरोपी नरेन्द्र बहादुर सोनी (40 वर्ष), निवासी खैरतराई ने अपने साथी हरिशंकर गजभिये के साथ मिलकर फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार कर जमीन बिक्री का प्रयास करने की बात स्वीकार की।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी जब्त किया है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
मुख्य आरोपी अब भी फरार
पुलिस के अनुसार मामले का दूसरा आरोपी हरिशंकर गजभिये निवासी परसोदा अभी फरार है। उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
दुर्ग-बालोद मुख्य मार्ग की बेशकीमती जमीन पर थी नजर
शिकायतकर्ता के अनुसार विवादित भूमि दुर्ग-बालोद मुख्य मार्ग पर स्थित है, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये तक आंकी जा रही है। ऐसे में यदि समय रहते मामला उजागर नहीं होता तो बड़ी आर्थिक धोखाधड़ी हो सकती थी।
जांच के घेरे में भूमि दलाली और दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था
इस मामले ने भूमि खरीद-बिक्री में सक्रिय दलालों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोहों तथा दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में और कौन-कौन लोग सामने आते हैं तथा फर्जी ऋण पुस्तिका आखिर कहां और कैसे तैयार की गई।
फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है।
