प्रधानपाठक महेंद्र कुमार साहू के नेतृत्व में तैयार हुआ प्रिंट-रिच वातावरण, ग्रामीणों के सहयोग से संवरा विद्यालय परिसर

बालोद। जिले के गुण्डरदेही विकासखंड से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला भरदाखुर्द आज सामुदायिक सहभागिता और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है। प्रधानपाठक महेंद्र कुमार साहू के नेतृत्व में शाला प्रबंधन समिति, पालकों और ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। बच्चों के लिए तैयार किया गया ‘प्रिंट-रिच’ शिक्षण वातावरण अब उनके आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है और यह विद्यालय क्षेत्र के अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ाने के लिए शुरू हुई पहल
प्रधानपाठक महेंद्र कुमार साहू ने बताया कि वर्ष 2023-24 से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से विद्यालय में नवाचार की शुरुआत की गई। शिक्षकों ने लगातार पालकों और ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर उन्हें विद्यालय की गतिविधियों से जोड़ा। परिणामस्वरूप विद्यालय, शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों के बीच आत्मीय संबंध मजबूत हुए।
ग्रामीणों ने दिया 50 हजार रुपये का सहयोग
विद्यालय के सौंदर्यीकरण एवं शिक्षण वातावरण को समृद्ध बनाने के लिए ग्रामीणों और पालकों ने स्वेच्छा से लगभग 50 हजार रुपये का सहयोग प्रदान किया। इस राशि से विद्यालय परिसर और कक्षाओं में सभी विषयों से संबंधित आकर्षक प्रिंट-रिच शैक्षणिक सामग्री तैयार कराई गई। दीवारों पर चित्रों, अक्षरों, संख्याओं, विज्ञान, गणित और सामान्य ज्ञान से जुड़ी सामग्री ने बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को रोचक बना दिया है।
श्रमदान से दूर हुई जलभराव की समस्या
बरसात के मौसम में विद्यालय परिसर में जलभराव और कीचड़ की समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने एक बार फिर आगे आकर लगभग 25 हजार रुपये का सहयोग और श्रमदान किया। इसके माध्यम से पूरे विद्यालय परिसर का फर्शीकरण कराया गया, जिससे अब बच्चों को विद्यालय आने-जाने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती।
जनसहयोग से स्थापित हुई माँ शारदे की प्रतिमा
ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय परिसर में माँ शारदे की स्थापना भी की गई है। इससे विद्यालय का वातावरण और अधिक प्रेरणादायी एवं संस्कारमय बन गया है। विद्यार्थी अब उत्साह और आनंद के साथ अध्ययन गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।
अन्य विद्यालयों के लिए बना प्रेरणास्रोत
जनभागीदारी, सामुदायिक सहयोग और नवाचारी शिक्षण व्यवस्था के कारण शासकीय प्राथमिक शाला भरदाखुर्द आज गुण्डरदेही विकासखंड ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभरी है। विद्यालय की इस पहल ने यह सिद्ध कर दिया है कि समुदाय, शिक्षक और पालक मिलकर सरकारी विद्यालयों को उत्कृष्ट शिक्षा का केंद्र बना सकते हैं।











