
समय पर स्कूल पहुंचने के बावजूद नहीं लग रही उपस्थिति, सर्वर-नेटवर्क और लोकेशन की समस्या से वेतन प्रभावित होने की आशंका
बालोद। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू किए गए VSK (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप को लेकर पूरे प्रदेश सहित बालोद जिले में शिक्षकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि वे प्रतिदिन समय पर विद्यालय पहुंचकर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं, लेकिन ऐप में आ रही तकनीकी खामियों के कारण उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है। इससे अनुपस्थित दर्शाए जाने और वेतन प्रभावित होने की आशंका ने शिक्षकों में असंतोष बढ़ा दिया है।
विद्यालय में मौजूद, फिर भी लोकेशन दिखा रही कई मीटर दूर
शिक्षकों के अनुसार कई बार विद्यालय परिसर में उपस्थित रहने के बावजूद VSK ऐप उनकी लोकेशन को स्कूल से कई मीटर दूर प्रदर्शित करता है। बार-बार लॉगिन, रिफ्रेश और पुनः प्रयास करने के बाद भी चेक-इन सफल नहीं हो पाता। कई मामलों में घंटों बाद उपस्थिति दर्ज होती है, जबकि कई शिक्षकों की उपस्थिति पूरे दिन दर्ज ही नहीं हो पाती।
प्रशिक्षण और शासकीय ड्यूटी में भी नहीं लग पा रही ऑन-ड्यूटी उपस्थिति

शिक्षकों ने बताया कि विभागीय प्रशिक्षण, बैठक या अन्य शासकीय कार्यों में भेजे जाने के बावजूद VSK ऐप में “ऑन ड्यूटी” विकल्प सही तरीके से कार्य नहीं कर रहा है। परिणामस्वरूप अधिकारी द्वारा भेजे जाने के बावजूद शिक्षक अनुपस्थित की सूची में शामिल हो रहे हैं।
सर्वर और नेटवर्क की समस्या से बढ़ी परेशानी
विशेष रूप से ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों के विद्यालयों में नेटवर्क कमजोर होने के कारण शिक्षक आधे-आधे घंटे तक केवल उपस्थिति दर्ज कराने में ही लगे रहते हैं। कई स्थानों पर सर्वर डाउन रहने से चेक-इन नहीं हो पाता, जबकि कहीं चेक-इन होने के बाद चेक-आउट का विकल्प ही दिखाई नहीं देता। कुछ मामलों में उपस्थिति का समय माइनस में भी प्रदर्शित होने की शिकायत सामने आई है।
अनुपस्थित सूची में नाम आने से मानसिक तनाव
राज्य एवं जिला स्तर से लगातार अनुपस्थित शिक्षकों की सूची जारी की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय में उपस्थित रहने के बावजूद सूची में नाम आने से मानसिक तनाव बढ़ रहा है और उनकी छवि भी प्रभावित हो रही है।
शिक्षकों ने कहा— गलती हमारी नहीं, सिस्टम की है
शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी खामियों का खामियाजा उन पर नहीं थोपा जाना चाहिए। यदि उपस्थिति दर्ज नहीं होने के आधार पर वेतन रोका जाता है तो यह उनके साथ अन्याय होगा। शिक्षकों का कहना है कि यदि वे अपना अधिकांश समय केवल ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में ही व्यतीत करेंगे, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक है।
शालेय शिक्षक संघ ने उठाए गंभीर सवाल

शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं जिलाध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने कहा कि निजी मोबाइल से अनिवार्य उपस्थिति लेना शिक्षकों की निजता का हनन है। उन्होंने कहा कि कीपैड मोबाइल अथवा पुराने एंड्रॉयड फोन रखने वाले शिक्षकों पर नए मोबाइल खरीदने का आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बरसात, नेटवर्क, सर्वर और ऐप की तकनीकी समस्याओं के कारण यदि VSK में उपस्थिति दर्ज नहीं होती, तो केवल उसी आधार पर वेतन देना अव्यवहारिक, तुगलकी और असंवैधानिक निर्णय है। विद्यालयों में उपस्थिति पंजी पर किए गए हस्ताक्षर पूर्णतः वैधानिक हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि VSK ही अंतिम व्यवस्था है तो फिर CAC, BRC, BEO, APC, DMC और DEO जैसे मॉनिटरिंग पदों की आवश्यकता क्या रह जाती है। उनका कहना है कि तकनीक का उपयोग शिक्षा सुधार के लिए होना चाहिए, न कि शिक्षकों को मानसिक, आर्थिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए।
राज्य कर्मचारी संघ ने भी जताई आपत्ति

राज्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र देशलहरे ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में प्रधान पाठक, माध्यमिक विद्यालयों में प्रधान पाठक तथा हाई एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों में प्राचार्य संस्था प्रमुख होते हैं, जिनकी जिम्मेदारी शिक्षकों की उपस्थिति और कार्यों का अवलोकन करना है। VSK ऐप लागू कर विभाग ने संस्था प्रमुखों पर ही अविश्वास जता दिया है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में वर्षों से संचालित उपस्थिति पंजी का महत्व समाप्त कर दिया गया है, जबकि VSK ऐप अभी पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय नहीं है। इसे पूरी तरह दुरुस्त किए बिना लागू करना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने शिक्षकों की निजी जानकारी और मोबाइल डेटा की सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त की।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने DEO से की चर्चा
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात कर डौंडी सहित जिले के विभिन्न विकासखंडों में आ रही तकनीकी समस्याओं से अवगत कराया। संगठन ने मांग की कि जब तक VSK ऐप पूरी तरह सुचारु नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए तथा तकनीकी कारणों से किसी भी शिक्षक को अनुपस्थित न माना जाए।
इस दौरान जिलाध्यक्ष दिलीप साहू, प्रदेश संगठन सचिव बीरबल देशमुख, जिला संयोजक रामकिशोर खरांशु, कामता प्रसाद साहू, जिला उपाध्यक्ष शिव शांडिल्य, वीरेन्द्र देवांगन, पवन जोशी, नीलेश देशमुख, कांतु राम चंदेल, जिला सचिव नरेंद्र साहू, जिला कोषाध्यक्ष पवन कुम्भकार, आईटी सेल प्रभारी हरीश कुमार साहू, शिवेंद्र बहादुर साहू, महेंद्र टांडिया, जिला महामंत्री शेषलाल साहू, राजेश चंद्राकर, संजय ठाकुर, रवींद्र नाथ योगी, संतोष देवांगन, धीराज सिंह कस्तुरे, भूपेंद्र पांडेय, अरविंद सोनी, जगत राम साहू, रिखी ध्रुव, ब्लॉक अध्यक्ष राजेंद्र देशमुख (गुंडरदेही), सूरज गोपाल गंगबेर (गुरूर), गजेंद्र रावटे (डौंडी), अविनाश साहू (डौंडीलोहारा) एवं श्रीमती अंजुलता योगी (बालोद) सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
- VSK ऐप की सभी तकनीकी खामियों का तत्काल समाधान किया जाए।
- सर्वर और नेटवर्क संबंधी समस्याओं का स्थायी निराकरण किया जाए।
- तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज न होने पर शिक्षकों को अनुपस्थित न माना जाए।
- उपस्थिति पंजी एवं संस्था प्रमुख के प्रमाणन को वैकल्पिक रूप से मान्य रखा जाए।
- ऑन-ड्यूटी, प्रशिक्षण एवं शासकीय कार्यों के लिए अलग और प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
- तकनीकी त्रुटियों के आधार पर किसी भी शिक्षक का वेतन प्रभावित न किया जाए।
शिक्षकों का कहना है कि विभाग को तकनीकी व्यवस्था में शीघ्र सुधार करते हुए ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य प्रभावित न हो और नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने वाले शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।












