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परंपरागत चिकित्सा को मिला राष्ट्रीय नेतृत्व

बालोद के नाड़ी वैद्य गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख बने अखिल भारतीय परंपरागत वन औषधि प्रशिक्षित वैद्य महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

उतई में दो दिवसीय राष्ट्रीय शिविर एवं शपथ ग्रहण समारोह संपन्न, देशभर से पहुंचे वैद्यराजों ने साझा किए अनुभव

मालीघोरी/उतई (दुर्ग)। अखिल भारतीय परंपरागत वन औषधि प्रशिक्षित वैद्य महासंघ, छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में नगर पंचायत उतई में दो दिवसीय राष्ट्रीय शिविर, संगोष्ठी एवं शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश एवं प्रदेश के विभिन्न राज्यों से आए वैद्यराजों और पदाधिकारियों की उपस्थिति में बालोद जिले के ग्राम भेड़ी के प्रसिद्ध नाड़ी वैद्य एवं समाजसेवी गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख को महासंघ का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।


देशभर के वैद्यराजों की मौजूदगी में हुआ शपथ ग्रहण

कार्यक्रम में महासंघ के राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तरीय नवनियुक्त पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण कराया गया। सभी पदाधिकारियों ने संगठन के उद्देश्यों, परंपरागत चिकित्सा पद्धति के संरक्षण एवं महासंघ के विकास के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करने की शपथ ली।


दुर्ग सांसद विजय बघेल ने परंपरागत चिकित्सा पद्धति को बताया अमूल्य धरोहर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुर्ग सांसद विजय बघेल ने कहा कि जड़ी-बूटियों पर आधारित पारंपरिक चिकित्सा पद्धति भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में वैद्यराज अपनी पारंपरिक ज्ञान-परंपरा से अनेक जटिल रोगों का सफल उपचार करते हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आयुष पद्धति को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है तथा ऐसी चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता है। सांसद ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को शपथ दिलाते हुए उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं भी दीं।


“निस्वार्थ सेवा ही हमारी सबसे बड़ी पहचान” : गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त होने के बाद अपने संबोधन में गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख ने कहा कि नाड़ी वैद्यों का सम्मान आज भी इसलिए कायम है क्योंकि वे निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से उपचार किए जाने के कारण सामान्यतः दुष्प्रभाव नहीं होते और लोगों का विश्वास इस चिकित्सा पद्धति पर लगातार बना हुआ है।

उन्होंने महासंघ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन को मजबूत बनाने तथा पारंपरिक वनौषधि एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।


संगोष्ठी में परंपरागत चिकित्सा पर हुआ मंथन

दो दिवसीय आयोजन के प्रथम दिवस संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें अनुभवी वैद्यराजों ने परंपरागत चिकित्सा पद्धति, औषधीय पौधों के संरक्षण तथा जनजागरूकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न औषधीय पौधों एवं उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। साथ ही आगंतुकों के लिए निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया।


इनकी रही प्रमुख उपस्थिति

कार्यक्रम को महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण साहू, राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र देकाटे, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष संतोष कुमार स्वर्णकार, राष्ट्रीय सचिव भारत सिंह, जिला अध्यक्ष गजानंद देवांगन, जिला सचिव सुरेंद्र बाबू गुप्ता, महिला प्रदेश अध्यक्ष सावित्री साहू, महाराष्ट्र महिला प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा नाइक, नासिक जिला अध्यक्ष अश्विनी खोड़के, नगर पंचायत उतई अध्यक्ष सरस्वती साहू, मीडिया प्रभारी संजय देवांगन तथा बी.एस. माथुर (विजयगढ़, उत्तर प्रदेश) सहित अनेक वरिष्ठ वैद्यराजों एवं पदाधिकारियों ने संबोधित किया।

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