दुर्ग-बालोद रोड की बेशकीमती भूमि पर कथित फर्जी सौदे का मामला, रजिस्ट्री रुकवाने पुलिस-प्रशासन से लगाई गुहार
बालोद। जिले के ग्राम लाटाबोड़ में स्थित कृषि भूमि को लेकर कथित फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। जमीन के मूल मालिक डर्मेंद्र कुमार गंजीर ने आरोप लगाया है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना कुछ लोग उनकी भूमि का सौदा कर रहे हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने थाना प्रभारी, तहसीलदार, उप पंजीयक, पुलिस अधीक्षक एवं कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर प्रस्तावित रजिस्ट्री पर रोक लगाने और पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है।
एक फोन कॉल ने खोल दी कथित जमीन सौदे की परतें
डर्मेंद्र कुमार गंजीर ने शिकायत में बताया कि 30 मई 2026 की सुबह ग्राम लाटाबोड़ में उनके भाई के माध्यम से मिनेश विश्वकर्मा निवासी टेकापार ने उनका मोबाइल नंबर प्राप्त कर संपर्क करने का प्रयास किया। बाद में बातचीत होने पर मिनेश विश्वकर्मा ने पूछा कि क्या वे अपनी जमीन बेच रहे हैं।
इस पर डर्मेंद्र गंजीर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने अपनी जमीन बेचने का कोई निर्णय नहीं लिया है और न ही किसी व्यक्ति से इस संबंध में कोई बातचीत की है। जब उन्होंने जानकारी का स्रोत पूछा तो देवारभाट निवासी वर्मा परिवार का नाम सामने आया। इसके बाद उन्होंने स्वयं संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी जुटानी शुरू की।
खुद को जमीन मालिक बताकर किया गया सौदे का प्रयास
डर्मेंद्र गंजीर के अनुसार बातचीत के दौरान कमला वर्मा ने बताया कि कुछ दिन पहले बालोद निवासी एक व्यक्ति “सोनी” के साथ एक अन्य व्यक्ति उनके घर आया था। उस व्यक्ति ने स्वयं को डर्मेंद्र कुमार गंजीर बताते हुए जमीन बेचने की बात की और ऋण पुस्तिका भी दिखाई।
कमला वर्मा के अनुसार दोनों पक्षों के बीच जमीन खरीदने को लेकर चर्चा हुई और छह माह का इकरारनामा भी तैयार किया गया। उन्होंने बताया कि सौदे के एवज में कुछ राशि एडवांस के रूप में भी दी जा चुकी है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक उन्होंने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही जमीन की रजिस्ट्री हुई है।
ऋण पुस्तिका में फोटो नहीं देखकर हुआ संदेह
कमला वर्मा का कहना है कि वे वास्तविक डर्मेंद्र गंजीर को पहले कभी नहीं जानती थीं। बातचीत के दौरान संबंधित व्यक्ति स्वयं को जमीन मालिक की तरह प्रस्तुत कर रहा था, लेकिन ऋण पुस्तिका में फोटो नहीं होने के कारण उन्हें संदेह हुआ।
उन्होंने कथित विक्रेता से फोटोयुक्त पहचान पत्र लाने को कहा तो उसने रजिस्ट्री वाले दिन फोटो लेकर आने की बात कही। इसी बीच असली डर्मेंद्र कुमार गंजीर का फोन आया और उन्होंने बताया कि वे ही वास्तविक भूमि स्वामी हैं तथा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उनके नाम का उपयोग किया जा रहा है। इसके बाद कमला वर्मा को भी संभावित धोखाधड़ी का एहसास हुआ।
व्हाट्सएप पर दस्तावेज भेजने से किया गया इंकार
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने अपने पिता से कमला वर्मा की बात कराई। इस दौरान उनके पिता ने कथित ऋण पुस्तिका और इकरारनामा व्हाट्सएप पर भेजने का अनुरोध किया, लेकिन दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
डर्मेंद्र गंजीर का कहना है कि जब एफआईआर दर्ज कराने की बात कही गई तो सामने वाले पक्ष ने दो दिन का समय मांगा और कहा कि उनका पैसा डूब जाएगा। इसके बाद बातचीत समाप्त हो गई।
एक ही जमीन की दो ऋण पुस्तिकाओं पर उठे गंभीर सवाल
डर्मेंद्र कुमार गंजीर ने आरोप लगाया है कि कथित सौदे में जिस ऋण पुस्तिका का उपयोग किया गया है, वह संदिग्ध प्रतीत होती है। उन्होंने बताया कि उस दस्तावेज में वर्ष 2018 की जारी तिथि अंकित है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक ही भूमि के लिए दो ऋण पुस्तिकाएं कैसे अस्तित्व में आ गईं। यदि दस्तावेज फर्जी है तो उसकी तैयारी कैसे हुई और किन लोगों की भूमिका रही, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
फर्जी दस्तावेज बनाने में विभागीय मिलीभगत की आशंका
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि यदि कथित ऋण पुस्तिका वास्तव में फर्जी है तो यह केवल व्यक्तिगत स्तर की धोखाधड़ी नहीं बल्कि दस्तावेजों की कूटरचना का मामला भी हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह के दस्तावेज तैयार करने में किसी विभागीय कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि जमीन दलालों तक ऐसे दस्तावेज कैसे पहुंच जाते हैं और क्या भोले-भाले लोगों को फंसाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का संगठित नेटवर्क सक्रिय है।
दुर्ग-बालोद रोड की बेशकीमती जमीन पर था कथित सौदा

डर्मेंद्र कुमार गंजीर ने बताया कि विवादित भूमि दुर्ग-बालोद मुख्य मार्ग पर स्थित है, जिसकी बाजार कीमत काफी अधिक है। उनके अनुसार लगभग 3 एकड़ भूमि में से करीब आधी जमीन का कथित तौर पर सौदा किया जा रहा था।
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार यह सौदा लगभग 1 करोड़ रुपये के आसपास का हो सकता है। समय रहते जानकारी मिलने से संभावित बड़े फर्जीवाड़े को रोका जा सका।
रजिस्ट्री रोकने और जांच की मांग
डर्मेंद्र कुमार गंजीर ने पुलिस एवं राजस्व प्रशासन से मांग की है कि उनकी भूमि की किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में थाना, तहसील कार्यालय, उप पंजीयक कार्यालय, पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंप दी गई है।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल मामला शिकायत और आरोपों के आधार पर जांच के दायरे में है। एक ओर जमीन के मूल मालिक ने फर्जीवाड़े की आशंका जताई है, वहीं दूसरी ओर कथित खरीदार पक्ष भी स्वयं को संभावित धोखाधड़ी का शिकार बता रहा है।
अब सभी की निगाहें पुलिस और राजस्व विभाग की जांच पर टिकी हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कथित जमीन सौदे के पीछे कौन लोग शामिल थे, दस्तावेजों की वास्तविकता क्या है और क्या वास्तव में करोड़ों रुपये की जमीन को फर्जी तरीके से बेचने का प्रयास किया गया था।
(नोट: यह समाचार संबंधित पक्षों द्वारा दिए गए बयानों एवं शिकायतों पर आधारित है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और प्रशासनिक निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट होगी।)
