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डौंडीलोहारा में राजस्व न्यायालय का फैसला, बुजुर्ग महिला रामकिशोरी गुप्ता को मिली राहत

तहसीलदार ने रिखबचंद संचेती का आवेदन किया खारिज, महिला ने कहा—‘सत्य की जीत हुई’

डौंडीलोहारा। नगर के एक लंबे समय से चले आ रहे राजस्व विवाद में तहसीलदार डौंडीलोहारा के न्यायालय ने बुजुर्ग महिला रामकिशोरी गुप्ता के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए उन्हें राहत प्रदान की है। आदेश के अनुसार, रिखबचंद संचेती द्वारा प्रस्तुत आवेदन को खारिज कर दिया गया है। निर्णय के बाद पीड़ित महिला एवं उनके परिवार ने इसे लंबे समय बाद मिली न्यायिक राहत बताते हुए खुशी व्यक्त की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामकिशोरी गुप्ता वर्ष 1985 से मध्यप्रदेश शासन द्वारा आबादी भूमि पर प्रदान किए गए पट्टे के आधार पर खसरा नंबर 520 स्थित भूमि पर मकान बनाकर निवास कर रही हैं। उनके मकान के समीप स्थित तहसील कार्यालय जाने वाले मुख्य मार्ग को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ था। महिला पक्ष का आरोप है कि रिखबचंद संचेती ने उक्त भूमि पर दावा करते हुए विभिन्न स्तरों पर आवेदन देकर मामले को विवादित बनाए रखा और उन्हें लगातार परेशान किया।

महिला पक्ष का यह भी आरोप है कि रिखबचंद संचेती ने जिला प्रशासन, अनुविभागीय अधिकारी एवं तहसील कार्यालय में प्रस्तुत दस्तावेजों में तथ्यों को छिपाते हुए राजस्व विभाग को गुमराह किया। उनका कहना है कि संबंधित भूमि से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दावा खारिज किए जाने की जानकारी भी निचली अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई और अलग-अलग विभागों में आवेदन देकर विवाद को लगातार जीवित रखा गया।

तहसीलदार द्वारा पारित आदेश में उल्लेख किया गया कि रामकिशोरी गुप्ता और उनका परिवार शासन से प्राप्त वैध पट्टे के आधार पर लगभग 40 वर्षों से उक्त भूमि पर काबिज है। आदेश में यह भी कहा गया कि रिखबचंद संचेती अपने दावे के समर्थन में ऐसा कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे संबंधित भूमि पर उनका अधिकार सिद्ध हो सके। उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों के परीक्षण के बाद उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया।

महिला पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि रिखबचंद संचेती द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत मकान निर्माण में भी बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार, उनके पास वर्ष 1985 का शासन द्वारा प्रदत्त पट्टा तथा वर्ष 2001-02 में ग्राम पंचायत द्वारा जारी भूमि अधिकार पत्र उपलब्ध है।

निर्णय के बाद रामकिशोरी गुप्ता ने कहा, “रिखबचंद संचेती द्वारा मुझे लंबे समय तक विभिन्न मामलों में परेशान किया गया। आज तहसीलदार न्यायालय से मुझे न्याय मिला है और सत्य की जीत हुई है।”

नोट: यह समाचार संबंधित पक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी एवं तहसीलदार न्यायालय के आदेश के संबंध में किए गए दावों पर आधारित है। यदि दूसरे पक्ष का पक्ष अथवा प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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