दूधली की मातृशक्ति बनीं श्रद्धा की मिसाल, वर्षों से बिना नागा निभा रही हैं सावन और शिवभक्ति की परंपरा
बालोद। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है। हर कोई अपनी आस्था के अनुसार भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करता है, लेकिन ग्राम दूधली बस स्टैंड निवासी लगभग 90 वर्षीय पार्वती भट्ट की अटूट शिवभक्ति लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बनी हुई है। उम्र के इस पड़ाव में भी वे वर्षों से प्रतिदिन सुबह भगवान शिव को जल अर्पित करने की अपनी परंपरा का निर्वहन कर रही हैं।
पार्वती भट्ट रोजाना सुबह लगभग 4 बजे उठकर अपने नित्य कर्मों से निवृत्त होती हैं, पूजा की थाली सजाती हैं और अपने घर से लगभग 500 मीटर दूर स्थित शिवलिंग पर जल चढ़ाने पैदल पहुंचती हैं। इसके बाद ही वे भोजन ग्रहण करती हैं। परिवार के सदस्य कई बार अस्वस्थ होने पर उन्हें आराम करने की सलाह देते हैं, लेकिन उनकी अटूट श्रद्धा उन्हें हर दिन शिव मंदिर तक खींच ले जाती है।

परिजनों का कहना है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा और नियमित दिनचर्या के कारण पार्वती भट्ट आज भी अपेक्षाकृत स्वस्थ हैं। उनका जीवन अनुशासित है। वे समय पर भोजन करती हैं, समय पर विश्राम करती हैं और शेष समय भगवान की भक्ति एवं पूजा-पाठ में व्यतीत करती हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें आज तक अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आई।
पार्वती भट्ट केवल स्वयं ही पूजा-अर्चना नहीं करतीं, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का कार्य करती हैं। कमर छठ, नवरात्रि और सावन जैसे पर्वों के दौरान वे अपने द्वारा लाए गए फूल और बेलपत्र अन्य महिलाओं को भी प्रदान करती हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग भगवान शिव की पूजा में सहभागी बन सकें।
ग्रामीणों का मानना है कि पार्वती भट्ट की अटूट आस्था, अनुशासित जीवनशैली और ईश्वर के प्रति समर्पण नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी शिवभक्ति यह संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा उम्र की मोहताज नहीं होती, बल्कि विश्वास और समर्पण ही भक्ति की सबसे बड़ी शक्ति है।











