फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, दोषियों को कड़ी सजा और सख्त कानून बनाने की उठाई मांग
दल्ली राजहरा। राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म एवं मानव तस्करी के मामले को लेकर हिंदू सेना, नगर इकाई दल्ली राजहरा ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया। संगठन के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एसडीएम दल्ली राजहरा के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर मामले में शीघ्र न्याय, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा सख्त कानून बनाए जाने की मांग की।
हिंदू सेना बालोद जिला अध्यक्ष श्रीमती नंदा पसीने ने कहा कि समाचारों के अनुसार सामने आई यह घटना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की सुरक्षा समाज और राष्ट्र की प्राथमिक जिम्मेदारी है तथा ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी न्याय होना आवश्यक है।

ज्ञापन में हिंदू सेना छत्तीसगढ़ के प्रदेश महामंत्री निलेश श्रीवास्तव ने केंद्र सरकार से मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की। संगठन ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि इस प्रकरण की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराकर छह माह के भीतर निर्णय सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जांच में यदि आरोपी दोषी सिद्ध होते हैं तो उनके विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम एवं अन्य लागू कानूनों के तहत अधिकतम दंड दिए जाने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त संगठन ने नाबालिगों के विरुद्ध सामूहिक दुष्कर्म और मानव तस्करी जैसे अपराधों के लिए अधिक कठोर कानूनी प्रावधान बनाए जाने की भी मांग उठाई।
श्रीमती नंदा पसीने ने कहा कि समाज में ऐसे जघन्य अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रपति से मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मातृशक्ति नगर अध्यक्ष संगीता रजक, उपाध्यक्ष साक्षी खटवानी, जिला उपाध्यक्ष ममता पटेल, महामंत्री पुष्पा साडिलय, संगठन सचिव गायत्री जैन, कोषाध्यक्ष पूजा तेजवानी, उपाध्यक्ष ज्योति राजा भोज, सचिव सुनीता भाड़ेकर, समाजसेवी आशा सिंह, वार्ड 26 की पार्षद टी. ज्योति, मीडिया प्रभारी शिखा सोनी सहित हिंदू सेना के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
नोट: इस समाचार में राजस्थान के श्रीगंगानगर की घटना के संबंध में वही दावे और मांगें प्रकाशित की गई हैं, जो हिंदू सेना द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति एवं ज्ञापन में व्यक्त की गई हैं। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया संबंधित एजेंसियों के अधीन है।











