▶ दुर्ग में संभागीय न्यायिक सेमीनार का आयोजन
बालोद, 12 अप्रैल 2026। दुर्ग संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा जिला न्यायालय दुर्ग में एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमीनार आयोजित किया गया। इसमें दुर्ग संभाग के पाँच जिलों से 92 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
▶ नए आपराधिक कानूनों पर दिया विशेष जोर
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नए आपराधिक कानून न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इनमें तकनीकी प्रगति और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से इन कानूनों की व्यावहारिक समझ विकसित करने का आह्वान किया।
▶ ई-साक्ष्य और त्वरित न्याय पर चर्चा
सेमीनार में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (ई-साक्ष्य) के बढ़ते महत्व, भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत इसकी ग्राह्यता और न्यायिक प्रक्रियाओं में इसके उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही धारा 138 (परक्राम्य लिखत अधिनियम) के मामलों के त्वरित निराकरण हेतु नवीन तकनीकों और प्रबंधन पर जोर दिया गया।
▶ मध्यस्थता मॉडल का विमोचन
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण क्षण “मध्यस्थता 2.0 – दुर्ग के लिए मध्यस्थता रणनीति मॉडल” नामक प्रकाशन का विमोचन रहा, जो वैकल्पिक विवाद समाधान को बढ़ावा देने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
▶ न्यायिक दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित सत्र
सेमीनार में आदेश 7 नियम 10-11, निष्पादन प्रकरण, बीएनएसएस की धाराएं, ई-साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण विधिक विषयों पर प्रस्तुतिकरण दिए गए। साथ ही नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रिफ्रेशर कोर्स भी आयोजित किया गया।
▶ निष्कर्ष
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका की वास्तविक शक्ति उसकी दक्षता, निष्पक्षता और न्याय के प्रति अटूट समर्पण में निहित है, और न्यायिक अधिकारियों की भूमिका जनता के विश्वास को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
