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“जनता को राहत नहीं, सिर्फ जुमले” — विधायक अनिला भेड़िया ने बजट पर साधा निशाना

डौंडीलोहारा/रायपुर। अनिला भेड़िया, विधायक डौंडीलोहारा एवं पूर्व मंत्री, छत्तीसगढ़ ने राज्य सरकार के हालिया बजट को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने बजट को “जनता को राहत नहीं, सिर्फ जुमले” बताते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने जिस उम्मीद और विश्वास के साथ इस बजट को देखा था, वह पूरी तरह टूट गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने बड़े-बड़े शब्दों में “संकल्प” की बात जरूर की, लेकिन हकीकत यह है कि यह बजट छत्तीसगढ़वासियों को राहत देने के बजाय उन्हें ठगने वाला साबित हुआ है। “कागजों में आंकड़ों का खेल जरूर दिखता है, मगर जमीन पर जनता के लिए कोई नई ठोस राहत नजर नहीं आती,” उन्होंने आरोप लगाया।


महिलाओं के लिए नई पहल का अभाव

विधायक भेड़िया ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर सिर्फ पुरानी घोषणाओं को दोहराया गया है। कोई नई प्रभावी योजना या ठोस आर्थिक सहायता का प्रावधान बजट में नजर नहीं आता। “महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बात तो की गई, लेकिन उसके लिए स्पष्ट नीति और संसाधनों की रूपरेखा नहीं दी गई,” उन्होंने कहा।


युवाओं को रोजगार पर स्पष्ट रोडमैप नहीं

युवाओं के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि स्थायी रोजगार सृजन को लेकर सरकार का कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है। “छोटे-छोटे प्रतीकात्मक प्रावधान कर देने से बेरोजगारी की गंभीर समस्या का समाधान नहीं होगा। युवाओं को ठोस अवसर और स्पष्ट दिशा चाहिए,” उन्होंने कहा।


किसानों के लिए राहत की ठोस गारंटी नहीं

किसानों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कर्ज, लागत और समर्थन मूल्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई नई ठोस पहल नहीं की गई। “सिर्फ पुराने वादों की पुनरावृत्ति की गई है। संघर्षरत किसान को इस बजट से कोई नई उम्मीद नहीं मिली,” उन्होंने आरोप लगाया।


1.72 लाख करोड़ के व्यय पर उठे सवाल

उन्होंने 1,72,000 करोड़ रुपये के कुल व्यय के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका बड़ा हिस्सा पहले से चल रही योजनाओं और देनदारियों में ही समाहित है। “आम जनता के लिए न कोई नया विजन दिखाई देता है, न कोई क्रांतिकारी पहल। अनुमानित राजस्व घाटा सरकार की वित्तीय अस्थिरता को भी दर्शाता है,” उन्होंने कहा।


आदिवासी समाज के लिए भी सिर्फ आंकड़े

विधायक भेड़िया ने कहा कि आदिवासी समाज, जो विकास की मुख्यधारा में आने की उम्मीद कर रहा है, उसके लिए भी बजट में सिर्फ भाषण और आंकड़े हैं। “वास्तविक परिवर्तन का अभाव साफ नजर आता है,” उन्होंने कहा।


“यह संकल्प नहीं, जनता के साथ छल”

अपने बयान के अंत में उन्होंने कहा कि यह बजट न महंगाई से जूझ रही गृहिणी को राहत देता है, न बेरोजगार युवा को उम्मीद देता है और न ही किसान को संबल देता है।

“सरकार आंकड़ों और प्रचार के सहारे अपनी विफलता छिपाने की कोशिश कर रही है, जबकि महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। इस बजट में न नई सोच है, न नई दिशा — सिर्फ पुराने वादों की नई पैकिंग है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता अब खोखले दावे नहीं, ठोस काम चाहती है और वे जनता की आवाज बनकर इस बजट का मजबूती से विरोध करते रहेंगे।

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