अंडा। दुर्ग और बालोद जिला के अंतिम छोर में बसे श्री विष्णु महायज्ञ ओटेबंद (बगीचा), जिला–बालोद में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर पूज्य संत श्री राजीव नयन जी महाराज (श्रीधाम वृंदावन) ने भक्तों को गहन आध्यात्मिक संदेश देते हुए जीवन को धर्ममय बनाने की प्रेरणा दी।
महाराज श्री ने कहा कि “जब सुख आए तो उसे भगवान की दया समझना चाहिए और जब दुख आए तो उसे भगवान की कृपा मानना चाहिए।” उन्होंने बताया कि परमात्मा जो करता है, वह जीव के कल्याण के लिए करता है। मांगने से कुछ नहीं मिलता, बल्कि वही प्राप्त होता है जो परमात्मा की इच्छा होती है।
संत श्री ने भक्तों को सत्संग और भजन के महत्व को समझाते हुए कहा कि एक क्षण का सत्संग भी भक्त को भगवान से मिला देता है। उन्होंने कहा – “तन सेवा से पवित्र होता है, धन दान से पवित्र होता है और मन भजन से पवित्र होता है।” यदि भजन में मन न लगे तो समझना चाहिए कि आहार शुद्ध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज मनुष्य के जीवन में आहार और व्यवहार में आए परिवर्तन के कारण ही समाज में अनेक बुराइयाँ उत्पन्न हो रही हैं।
युवाओं को संदेश देते हुए संत श्री ने नियमित दिनचर्या अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा –
“सौ काम छोड़कर भोजन करना चाहिए, हजार काम छोड़कर स्नान करना चाहिए, लाख काम छोड़कर दान करना चाहिए और करोड़ों काम छोड़कर भजन करना चाहिए।”
भागवत प्रसंग में महाराज श्री ने राजा परीक्षित का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षित विश्व के प्रथम जीव थे जिन्होंने जन्म से पहले ही भगवान का दर्शन किया। उन्हें ज्ञात था कि सातवें दिन उनकी मृत्यु होगी, परंतु संसार के अन्य जीवों को अपने मृत्यु समय का ज्ञान नहीं है। मृत्यु शाश्वत सत्य है – जो जन्म लेता है, उसे एक दिन जाना ही है। इसलिए जीवन में नित्य भजन-कीर्तन को शामिल करना आवश्यक है।
महाराज जी ने आगे कहा कि कलियुग धर्मदान पर टिका है और तक्षक नाग द्वारा परीक्षित को मुक्ति मिलने के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। साथ ही श्रवण कुमार की कथा सुनाकर माता-पिता की सेवा, त्याग और समर्पण का संदेश दिया। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
कथा स्थल पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और संत श्री के मुखारविंद से अमृतमयी वचनों का श्रवण किया। भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
