बकरीद पर जीवित प्राणी की कुर्बानी के बजाय केक काटकर रस्म निभाने की अपील



अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा — “अहिंसा और मानवता का संदेश अपनाएं”

बालोद। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने ईदुज्जुहा (बकरीद) के अवसर पर जीवित प्राणियों की कुर्बानी देने के बजाय केक काटकर धार्मिक रस्म अदा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी धर्म प्रेम, करुणा और अहिंसा का संदेश देते हैं तथा किसी भी निर्दोष प्राणी की जान लेना उचित नहीं है।

डॉ. मिश्र ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में देश के कई हिस्सों में जागरूकता के चलते लोगों ने बकरीद पर पशु कुर्बानी के स्थान पर “इको फ्रेंडली ईद” मनाने की पहल की है। कई स्थानों पर लोगों ने बकरे की जगह केक काटकर सांकेतिक रूप से धार्मिक परंपरा निभाई और पशुओं की रक्षा का संदेश दिया।


तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश का दिया हवाला

डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया कि तेलंगाना हाई कोर्ट में ईदुज्जुहा के दौरान ऊंटों की कुर्बानी पर रोक लगाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने परंपरा के नाम पर ऊंटों को नहीं मारने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों में भी अलग-अलग समय पर धार्मिक अवसरों पर पशु कुर्बानी को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं।


“कुर्बानी का अर्थ त्याग है”

डॉ. मिश्र ने कहा कि कुर्बानी का वास्तविक अर्थ त्याग और सेवा की भावना है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोग जरूरतमंदों को दवा, कपड़े, किताबें, स्कूल फीस या आर्थिक सहायता देकर भी आत्मसंतुष्टि प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि हम किसी को जीवन नहीं दे सकते, तो किसी की जान लेने का अधिकार भी हमें नहीं होना चाहिए। महात्मा बुद्ध और भगवान महावीर के अहिंसा सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने “जियो और जीने दो” का संदेश अपनाने की अपील की।


देशभर में चलाया जा रहा जनजागरण अभियान

डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया कि अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति पिछले कई वर्षों से पशुबलि और क्रूर परंपराओं के खिलाफ जनजागरण अभियान चला रही है। इसके परिणामस्वरूप महाराष्ट्र, बेमेतरा सहित कई स्थानों पर बलि प्रथा बंद करने की पहल हुई है।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भारत के कई शहरों — लखनऊ, आगरा, मेरठ, मुजफ्फरपुर आदि में लोगों ने बकरीद पर केक काटकर सांकेतिक रूप से रस्म अदा की और पशु संरक्षण का संदेश दिया।

अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रेम, करुणा और मानवता के मूल्यों को अपनाते हुए अहिंसा आधारित समाज निर्माण में सहयोग करें।

You cannot copy content of this page