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सरपंचों का सामूहिक इस्तीफा बना बड़ा सवाल: “क्या पंचायती राज व्यवस्था दम तोड़ रही है?”

अंतागढ़ ब्लॉक के सभी सरपंचों के इस्तीफे पर जिला सरपंच संघ अध्यक्ष क्रांति भूषण साहू ने जताई गहरी चिंता

बालोद। अंतागढ़ ब्लॉक के सभी सरपंचों द्वारा अपनी मांगों और समस्याओं पर ध्यान नहीं दिए जाने के विरोध में सामूहिक इस्तीफा दिए जाने का मामला अब पूरे प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। जिला सरपंच संघ अध्यक्ष क्रांति भूषण साहू ने इस घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि यदि शासन-प्रशासन ने समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में प्रदेश के अन्य ब्लॉकों में भी ऐसी ही परिस्थितियां निर्मित हो सकती हैं।

“सरपंच बनना अब सम्मान नहीं, सजा जैसा महसूस हो रहा”

क्रांति भूषण साहू ने कहा कि आज ग्राम पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि लगातार प्रशासनिक उपेक्षा और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। सरपंच अपनी समस्याओं को लेकर अधिकारियों के सामने आवेदन और निवेदन करते-करते थक चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल रहा।

उन्होंने कहा कि आज स्थिति ऐसी हो गई है कि कई सरपंचों को पंचायत कार्यों के लिए निजी कर्ज लेना पड़ रहा है। कोई घर के गहने गिरवी रख रहा है तो कोई ब्याज में पैसा लेकर मटेरियल भुगतान कर रहा है। इसके बावजूद महीनों तक भुगतान नहीं हो रहा।

“सुशासन तिहार पंचायतों के खर्च पर, लेकिन समस्याएं जस की तस”

उन्होंने आरोप लगाया कि सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रम पंचायतों के खर्चों से संचालित हो रहे हैं, लेकिन पंचायतों की मूल समस्याओं पर सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। जिले में “नीर चेतना अभियान” चलाया जा रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पेयजल के लिए भटक रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कई पंचायतों में पेयजल व्यवस्था के लिए उपलब्ध टाइड फंड बेहद अपर्याप्त है और बार-बार मांग करने के बावजूद कोई ठोस मदद नहीं मिल रही।

नरेगा भुगतान में देरी से बढ़ी परेशानी

जिला सरपंच संघ अध्यक्ष ने कहा कि महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में पहले सामग्री संग्रहण के बाद भुगतान हो जाता था, लेकिन अब कार्य पूर्ण होने के बाद भी 6 महीने से एक साल तक भुगतान अटका रहता है। इससे पंचायतों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि केवल मीडिया में “गारंटी-गारंटी” कह देने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती। वास्तविक स्थिति यह है कि पंचायती राज व्यवस्था आज शोषण और उपेक्षा का शिकार हो रही है।

“8 महीने से मानदेय नहीं, आखिर जिम्मेदार कौन?”

क्रांति भूषण साहू ने सवाल उठाया कि अंतागढ़ ब्लॉक के सरपंचों को 8 महीने से मानदेय नहीं मिला है, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्राम विकास के लिए बनी योजनाओं का लाभ जमीन पर नहीं पहुंच पा रहा है।

DMF से वंचित गांवों के विकास पर भी उठाए सवाल

उन्होंने कहा कि DMF से वंचित ग्रामों के विकास के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नजर नहीं आती। गांवों में स्कूल भवन जर्जर हैं, गलियां खराब हैं, पुल-पुलिया और नालियों की स्थिति बदहाल है, आंगनबाड़ी भवनों की हालत खराब है, लेकिन इन बुनियादी समस्याओं की ओर न तो बड़े जनप्रतिनिधियों का ध्यान है और न ही प्रशासनिक अधिकारियों का।

“सिर्फ शेड निर्माण के प्रस्ताव लेकर घूम रहे लोग”

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज गांव-गांव में कुछ लोग केवल शेड निर्माण के प्रस्ताव लेकर घूम रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की असली जरूरतें कहीं ज्यादा गंभीर हैं।

जिला सरपंच संघ ने शासन से पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का जल्द समाधान करने, लंबित भुगतान जारी करने और पंचायतों को आर्थिक एवं प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने की मांग की है।

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