सुशासन तिहार की खुली पोल: संजारी समाधान शिविर से दोपहर 2 बजे ही नदारद हुए अधिकारी-कर्मचारी



ग्रामीण आवेदन लेकर भटकते रहे, विधायक अनिला भेड़िया ने लगाई फटकार

बोधन भट्ट की रिपोर्ट, डौंडीलोहारा/बालोद। शासन की महत्वाकांक्षी पहल सुशासन तिहार 2025 के तहत ग्राम संजारी में आयोजित समाधान शिविर में भारी लापरवाही और अव्यवस्था देखने को मिली। 21 ग्राम पंचायतों के लिए लगाए गए इस शिविर में दोपहर 2 बजे के बाद ही अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी गायब हो गए, जबकि शिविर का निर्धारित समय शाम 5 बजे तक था। इससे दूर-दराज से पहुंचे ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।

जिला स्तर का एक भी अधिकारी नहीं पहुंचा

ग्रामीणों के मुताबिक शिविर में जिला स्तर का कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं था। केवल जनपद पंचायत CEO और देवरी तहसीलदार ही मौके पर मौजूद रहे। इससे लोगों में नाराजगी देखने को मिली।

दोपहर बाद खाली हो गईं विभागों की कुर्सियां

शिविर में आए ग्रामीण अपनी समस्याओं और मांगों के आवेदन लेकर अधिकारियों की तलाश करते रहे, लेकिन दोपहर 2 बजे के बाद अधिकांश विभागों की कुर्सियां खाली नजर आईं। लोगों का कहना है कि अधिकारी-कर्मचारी बिना जानकारी दिए शिविर छोड़कर चले गए।

हितग्राहियों को नहीं मिला समाधान

शासन द्वारा समाधान शिविरों का उद्देश्य मौके पर ही समस्याओं का निराकरण करना तय किया गया है, लेकिन संजारी शिविर में पहुंचे कई ग्रामीण बिना समाधान के वापस लौट गए। दूर-दराज के गांवों से आए हितग्राही पूरे दिन परेशान होते रहे।

विधायक अनिला भेड़िया ने जताई नाराजगी

मौके पर पहुंचीं डौंडीलोहारा विधायक अनिला भेड़िया ने शिविर की अव्यवस्था देखकर नाराजगी जताई। उन्होंने अनुपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि जब जनता की समस्याओं के समाधान के लिए लगाए गए शिविरों में ही अधिकारी मौजूद नहीं रहेंगे, तो सुशासन की अवधारणा कैसे सफल होगी, खाद की समस्या को लेकर भी उन्होंने एक अधिकारी से कहा कि किसानों को बेवकूफ बनाना बंद करो कई जगह सप्लाई नहीं हुई है।

शासन के निर्देशों की उड़ाई गई धज्जियां

गौरतलब है कि सुशासन तिहार के तीसरे चरण के अंतर्गत 5 मई से 31 मई तक समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। शासन द्वारा शिविर का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। शिविरों में पुराने आवेदनों के निराकरण की जानकारी देने और नए आवेदन लेकर तत्काल समाधान करने के निर्देश हैं, लेकिन संजारी शिविर में इन निर्देशों की खुलेआम अनदेखी होती नजर आई।

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