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इंस्टाग्राम पर दोस्ती, शादी का झांसा और दुष्कर्म: पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को सुनाई 20 साल की सजा

नाबालिग को बहला-फुसलाकर हैदराबाद ले गया आरोपी, विशेष न्यायालय बालोद का बड़ा फैसला

बालोद। नाबालिग युवती को शादी का प्रलोभन देकर दुष्कर्म करने वाले आरोपी को विशेष पॉक्सो न्यायालय बालोद ने कठोर सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफटीएससी (पॉक्सो) बालोद श्री कृष्ण कुमार सूर्यवंशी की अदालत ने आरोपी लीलाराम यादव (23 वर्ष) निवासी दैहानपारा, बालको जिला कोरबा को विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

पॉक्सो एक्ट सहित कई धाराओं में दोषी करार

न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड, धारा 87 के तहत 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।

यह फैसला 21 मई 2026 को सुनाया गया।

इंस्टाग्राम से हुई पहचान, फिर शुरू हुआ शोषण

विशेष लोक अभियोजक बसंत कुमार देशमुख के अनुसार, मार्च 2024 में आरोपी और नाबालिग पीड़िता की पहचान इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। दोनों के बीच मोबाइल पर बातचीत शुरू हुई और आरोपी ने युवती को अपने प्रेमजाल में फंसा लिया।

धमकी देकर बुलाया, फिर बनाया शारीरिक संबंध

प्रकरण के अनुसार, 5 जुलाई 2024 को आरोपी डौण्डी पहुंचा और रात करीब 11 बजे बाजारपारा स्थित शिव मंदिर के पास पीड़िता को बुलाया। मना करने पर आरोपी ने बदनाम करने की धमकी दी, जिससे डरकर पीड़िता उससे मिलने पहुंची। वहां आरोपी ने शादी करने का झांसा देकर मंदिर के पास उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया।

इसके बाद 16 जुलाई 2024 को आरोपी ने फिर पीड़िता को स्कूल मैदान में बुलाकर जबरन दुष्कर्म किया।

हैदराबाद ले जाकर जबरन रखा साथ

आरोपी 28 जुलाई 2024 को पीड़िता को बालोद बुलाकर राजनांदगांव होते हुए ट्रेन से हैदराबाद ले गया। वहां मंदिर में जबरन शादी कर किराये के मकान में रखा और लगातार दुष्कर्म करता रहा।

बाद में 2 नवंबर 2024 को आरोपी पीड़िता को वापस डौण्डी छोड़कर चला गया और रिश्ता खत्म करने की बात कही।

परिजनों की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

पीड़िता ने पूरी घटना अपने माता-पिता को बताई, जिसके बाद पिता ने थाना डौण्डी में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अपराध क्रमांक 97/2024 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

प्रकरण की विवेचना उप निरीक्षक इंदिरा वैष्णव द्वारा की गई, जबकि प्रथम सूचना पत्र सहायक उपनिरीक्षक दुर्जन लाल रावटे द्वारा दर्ज किया गया। विवेचना पूर्ण होने के बाद 26 सितंबर 2025 को न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।

विशेष न्यायालय का सख्त संदेश

विशेष पॉक्सो न्यायालय के इस फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों पर सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों को शादी का झांसा देकर शोषण करने वालों के खिलाफ कानून बेहद कठोर है।

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