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मूकबधिर नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले 68 वर्षीय आरोपी को 20 साल की सजा

दो माह की गर्भवती मिलने पर खुला मामला, पॉक्सो कोर्ट बालोद ने सुनाया कड़ा फैसला

बालोद। मूकबधिर नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के गंभीर मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय बालोद ने आरोपी को कठोर सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफटीएससी (पॉक्सो) बालोद श्री कृष्ण कुमार सूर्यवंशी की अदालत ने आरोपी गजानंद राव (68 वर्ष) निवासी हटरी चौक खण्डेलवाल कॉम्प्लेक्स, गुण्डरदेही को दोषी पाते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में दोषी करार

न्यायालय ने आरोपी को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) 2012 की धारा 5(ट), 5(ड) एवं 5(ञ) के उल्लंघन में धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए प्रत्येक आरोप में 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 500-500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।

यह निर्णय 20 मई 2026 को सुनाया गया।

पेट दर्द की शिकायत पर सामने आया मामला

विशेष लोक अभियोजक बसंत कुमार देशमुख के अनुसार, 10 जून 2025 को मूकबधिर नाबालिग पीड़िता के पेट में दर्द होने पर उसकी मां उसे शासकीय अस्पताल गुण्डरदेही लेकर गई। जांच के दौरान डॉक्टरों ने पीड़िता को लगभग दो माह की गर्भवती पाया।

यह जानकारी सामने आने के बाद पीड़िता की मां ने इशारों में उससे पूछताछ की। तब पीड़िता ने बताया कि आरोपी कई बार उसके साथ दुष्कर्म कर चुका है।

बाथरूम में ले जाकर करता था गलत काम

पीड़िता ने बताया कि पहली घटना 14 मार्च 2025 होली के दिन हुई थी, जब आरोपी उसे अपने बाथरूम में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी लगातार उसे बाथरूम में ले जाकर गलत काम करता रहा।

पीड़िता के अनुसार, आखिरी बार 7 जून 2025 को आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और घटना किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

मां की शिकायत पर दर्ज हुआ अपराध

पीड़िता की मां ने उसी दिन थाना गुण्डरदेही पहुंचकर आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले में उपनिरीक्षक राधा बोरकर द्वारा अपराध क्रमांक 168/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

न्यायालय ने माना गंभीर अपराध

प्रकरण की विवेचना उपनिरीक्षक राधा बोरकर द्वारा की गई। सम्पूर्ण विवेचना और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई।

विशेष पॉक्सो न्यायालय के इस फैसले को नाबालिगों, विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के खिलाफ अपराधों पर कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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