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आधी पेंशन से टूट चुकी थी उम्मीद, संजय बैस की पहल से 70 वर्षीय गणेशिया बाई को मिला पूरा हक

महतारी वंदन योजना में विभागीय गलती से हर महीने मिल रहे थे सिर्फ 500 रुपये, अब खाते में आने लगे पूरे 1000 रुपये

बालोद/कुसुमकसा। “अब 1000 रुपये मिलेंगे तो बुढ़ापा थोड़ा आसान हो जाएगा… मैं तो उम्मीद ही छोड़ चुकी थी, संजय बेटा भगवान बनकर आया।” यह कहते हुए 70 वर्षीय गणेशिया बाई देशमुख की आंखें नम हो गईं। कुसुमकसा निवासी गणेशिया बाई पिछले कई महीनों से महतारी वंदन योजना की अधूरी राशि मिलने से परेशान थीं। शासन की योजना के तहत उन्हें हर माह 1000 रुपये मिलना था, लेकिन विभागीय त्रुटि के कारण उनके खाते में केवल 500 रुपये ही पहुंच रहे थे।

कागजों की गलती ने छीन लिया था बुढ़ापे का सहारा

जानकारी के अनुसार, आवेदन प्रक्रिया के दौरान हुई लिपिकीय गलती की वजह से रिकॉर्ड में वृद्धा पेंशन का उल्लेख हो गया, जबकि गणेशिया बाई ने कभी वृद्धा पेंशन के लिए आवेदन ही नहीं किया था। इसी कारण महतारी वंदन योजना की पूरी राशि उन्हें नहीं मिल पा रही थी।

गणेशिया बाई और उनके पति दोनों 70 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और उनकी कोई संतान नहीं है। ऐसे में बुढ़ापे में जीवनयापन का मुख्य सहारा यही सरकारी योजना थी। आधी राशि मिलने से दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया था।

जनप्रतिनिधियों के चक्कर, लेकिन नहीं मिला समाधान

गणेशिया बाई ने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। लगातार भटकने के बाद उन्होंने पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस से मदद की गुहार लगाई।

संजय बैस की पहल से सुधरी विभागीय चूक

मामले को गंभीरता से लेते हुए संजय बैस ने तुरंत संबंधित विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया और पूरी जानकारी जुटाई। उनकी पहल के बाद विभागीय त्रुटि को सुधारा गया और इस माह से गणेशिया बाई के खाते में पूरे 1000 रुपये की राशि आना शुरू हो गई।

“अब दो वक्त की रोटी की चिंता कम हुई”

खाते में पूरी राशि पहुंचने के बाद गणेशिया बाई भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि अब उन्हें बुढ़ापे में थोड़ी राहत महसूस हो रही है। उन्होंने संजय बैस का आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयास से ही उन्हें उनका हक मिल पाया।

ग्रामीण बोले — संवेदनशील जनप्रतिनिधि ही बनते हैं सहारा

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि संजय बैस ने एक बार फिर साबित किया है कि यदि जनप्रतिनिधि संवेदनशील हो तो कागजों में उलझी योजनाएं भी जरूरतमंदों तक पहुंच सकती हैं। यह मामला यह भी दिखाता है कि छोटी सी विभागीय गलती किसी बुजुर्ग की जिंदगी को कितना प्रभावित कर सकती है।

“जनता और प्रशासन के बीच सेतु बनना ही जिम्मेदारी” — संजय बैस

इस पूरे मामले पर संजय बैस ने कहा कि प्रशासन और जनता के बीच सेतु बनना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी बुजुर्ग की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। गणेशिया बाई के चेहरे पर मुस्कान लौटना उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है।

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