बालोद। जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में गिरावट को आधार बनाकर किए गए प्राचार्यों के निलंबन मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने के बाद कलेक्टर बालोद द्वारा जारी निलंबन आदेश निरस्त कर दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद शिक्षक संगठनों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है।
प्राचार्य ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
जानकारी के अनुसार, प्रभावित प्राचार्य श्री पुरुषोत्तम कुमार साहू, प्राचार्य उच्च माध्यमिक विद्यालय भिरई ने कलेक्टर द्वारा जारी निलंबन आदेश को माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। याचिका में यह सवाल उठाया गया था कि क्या कलेक्टर को राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन आदेश जारी करने का अधिकार है।
न्यायालय ने अधिकार क्षेत्र पर उठाया सवाल
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के संभागीय अध्यक्ष श्री भुवन सिन्हा ने बताया कि माननीय न्यायालय ने माना कि संबंधित प्राचार्य द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी हैं तथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं निलंबन का अधिकार केवल सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग को प्राप्त है। ऐसे में कलेक्टर द्वारा जारी आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर माना गया।
शिक्षक संगठनों ने पहले ही जताया था विरोध
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ सहित जिले के कई कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों ने प्रारंभ से ही इस कार्रवाई को अवैधानिक और एकतरफा बताया था। संगठनों का कहना था कि परीक्षा परिणाम के आधार पर सीधे निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में भय का माहौल पैदा करेगी।
“हठधर्मिता के कारण न्यायालय जाना पड़ा”
संभागीय अध्यक्ष भुवन सिन्हा ने कहा कि यदि प्रशासन स्तर पर विधिसम्मत तरीके से निर्णय लिया जाता तो प्राचार्य को न्यायालय की शरण में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल प्रभावित प्राचार्यों के लिए राहत है बल्कि प्रशासनिक अधिकारों की सीमा को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय भी है।
जिले में बना चर्चा का विषय
यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि भविष्य में किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से पहले सेवा नियमों और अधिकार क्षेत्र का गंभीरता से परीक्षण किया जाना आवश्यक है।
