पूर्व में सौंपे गए ज्ञापन के बाद भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई, लोगों में बढ़ा आक्रोश
बालोद। बालोद शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
5 वर्षीय मासूम बना आवारा कुत्ते का शिकार
इसी बीच रविवार सुबह बालोद से लगे ग्राम मेढ़की से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया। जानकारी के अनुसार ग्राम मेढ़की निवासी लगभग 5 वर्षीय मासूम हेजल भारद्वाज पर सुबह करीब 6:30 बजे एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि कुत्ते ने बच्चे के निजी अंग के पास काट लिया, जिससे बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल बच्चे को जिला अस्पताल बालोद पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया। फिलहाल बच्चे का उपचार चिकित्सकीय निगरानी में जारी है।
सुबह-शाम सबसे ज्यादा खतरा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव और शहर में आवारा कुत्तों के झुंड लगातार बढ़ते जा रहे हैं। खासकर सुबह और शाम के समय ये कुत्ते राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों पर हमला करने दौड़ पड़ते हैं। कई लोग पहले भी इनके शिकार हो चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
पहले भी सौंपा गया था ज्ञापन
जनहित में समर्पित जन सेवक उमेश कुमार सेन ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर पूर्व में जिला कलेक्टर के नाम एसडीएम बालोद को ज्ञापन सौंपा गया था। ज्ञापन में आवारा कुत्तों की गणना, पकड़ने की व्यवस्था, टीकाकरण, नसबंदी अभियान और नागरिक सुरक्षा हेतु विशेष कार्ययोजना लागू करने की मांग की गई थी।
उन्होंने कहा कि ज्ञापन देने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है, जिसके कारण अब स्थिति भयावह होती जा रही है।
“बड़ी घटना का इंतजार कर रहा प्रशासन”
उमेश कुमार सेन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में और भी गंभीर घटनाएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने नगर पालिका और जिला प्रशासन से तत्काल विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल
घटना के बाद ग्राम मेढ़की सहित आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों के कारण बच्चों को अकेले बाहर भेजना मुश्किल हो गया है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द डॉग कंट्रोल अभियान चलाकर लोगों को राहत दी जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।
